Ranchi: राजधानी रांची में बढ़ते ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह सिर्फ वाहनों की संख्या नहीं, बल्कि ऑटो और ई-रिक्शा के लिए पर्याप्त व्यवस्था का अभाव भी है. शहर में करीब 25 हजार से अधिक ऑटो और ई-रिक्शा चल रहे हैं, लेकिन इनके लिए नगर निगम की ओर से सिर्फ तीन अधिकृत स्टैंड हैं. ऐसे में हजारों ऑटो सड़क किनारे ही सवारी बैठाते और उतारते हैं, जिससे हर दिन शहर की प्रमुख सड़कें जाम की चपेट में आ जाती हैं. सुबह और शाम के व्यस्त समय में अल्बर्ट एक्का चौक, मेन रोड, कचहरी, लालपुर, हरमू, रातू रोड, कांटा टोली, बिरसा चौक और अरगोड़ा जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा जाम देखने को मिलता है. सड़क के बीच या किनारे खड़े ऑटो की वजह से पीछे वाहनों की लंबी कतार लग जाती है और कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका जाम हो जाता है. इसका असर सबसे ज्यादा आम लोगों पर पड़ रहा है. दफ्तर जाने वाले कर्मचारी देर से पहुंच रहे हैं, छात्र-छात्राओं को स्कूल और कॉलेज जाने में परेशानी हो रही है, वहीं कई बार मरीजों को लेकर जा रही एंबुलेंस भी जाम में फंस जाती है.
2024 में बने थे 17 तय रूट, लेकिन नियम सिर्फ कागजों तक सीमित
शहर में ऑटो संचालन को व्यवस्थित करने के लिए वर्ष 2024 में 17 निर्धारित रूट तय किए गए थे. साथ ही यह भी प्रावधान किया गया था कि यदि कोई ऑटो निर्धारित रूट छोड़कर दूसरे रूट पर चलता है तो उस पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है. लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि बड़ी संख्या में ऑटो बिना रूट आवंटन के शहर के किसी भी हिस्से में चल रहे हैं. नियम तो बनाए गए, लेकिन उनका पालन कराने की व्यवस्था नहीं दिख रही. न तो रूट सिस्टम प्रभावी ढंग से लागू हो सका और न ही नियमित जांच हो रही है.

ये हैं शहर के 17 निर्धारित ऑटो रूट
राजेंद्र चौक – धुर्वा बस स्टैंड
राजेंद्र चौक – सदाबहार चौक
बिरसा चौक – रिंग रोड (सिंह मोड़ होकर)
बिरसा चौक – हरमू चौक
शहीद मैदान – रिंग रोड
कचहरी चौक – कांटाटोली होकर ओवरब्रिज
जुमार पुल – किशोरी यादव चौक
जुमार पुल – चडरी
जुमार पुल – रांची रेलवे स्टेशन
कोकर – लालपुर
कांटाटोली – कचहरी
कांटाटोली – दुर्गा सोरेन चौक
डंगरा टोली – सदर अस्पताल
कांके चौक – हरमू पुल
कांके चौक – किशोरी यादव चौक
किशोरी यादव चौक – पंडरा पुल
किशोरी यादव चौक – कटहल मोड़
ऑटो चालकों की भी अपनी परेशानी
ऑटो चालकों का कहना है कि वे जानबूझकर सड़क पर वाहन खड़ा नहीं करते. शहर में पर्याप्त और सुविधाजनक ऑटो स्टैंड नहीं होने की वजह से उन्हें मजबूरी में सड़क किनारे ही सवारी बैठानी और उतारनी पड़ती है. उनका आरोप है कि समय-समय पर अलग-अलग जगहों पर उनसे बेवजह वसूली भी की जाती है. इसी कारण ऑटो चालक संघ कई बार हड़ताल पर भी उतर चुका है.
नियम भी चाहिए, व्यवस्था भी
रांची में ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान सिर्फ चालान काटने या जुर्माना लगाने से नहीं होगा. जब तक शहर में पर्याप्त ऑटो स्टैंड नहीं बनेंगे, तय रूट का सख्ती से पालन नहीं कराया जाएगा और ट्रैफिक प्रबंधन मजबूत नहीं होगा, तब तक राजधानी की सड़कों पर जाम की तस्वीर बदलना मुश्किल होगा. नगर निगम का कहना है कि नए ऑटो और ई-रिक्शा स्टैंड बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है. ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर संभावित स्थानों की पहचान की जा रही है, ताकि शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके.


