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हजारीबाग: दो हफ्ते से मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रहा UP से आया परिवार, चौपारण CHC की कार्यशैली पर गंभीर सवाल

Hazaribagh: सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक की इलाज के दौरान हुई मौत के बाद भी सरकारी व्यवस्था की संवेदनहीनता सामने आई...

दो हफ्ते से मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रहा UP से आया परिवार, चौपारण CHC की कार्यशैली पर गंभीर सवाल

Hazaribagh: सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक की इलाज के दौरान हुई मौत के बाद भी सरकारी व्यवस्था की संवेदनहीनता सामने आई है.चौपारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मृतक के परिजनों ने गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. दावा किया गया है कि घटना के लगभग दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी अस्पताल ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया, जिसके कारण परिवार सरकारी प्रक्रियाओं से लेकर अन्य आवश्यक कार्यों तक में परेशानियों का सामना कर रहा है.
मामला यूपी के निवासी रविशंकर राम का है, जो 25 जून को दनुआ घाटी में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उन्हें इलाज के लिए चौपारण सीएचसी लाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई. इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

आवेदन देने के बाद भी नहीं मिला प्रमाण पत्र

मृतक के पिता दौलत राम का आरोप है कि उन्होंने 27 जून को सीएचसी प्रभारी को लिखित आवेदन देकर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का अनुरोध किया था. इसके बावजूद अब तक प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया. उनका कहना है कि बिना मृत्यु प्रमाण पत्र के परिवार बीमा, बैंक, सरकारी सहायता और अन्य जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं कर पा रहा है.

‘एक टेबल से दूसरी टेबल तक दौड़ाया गया’

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन और ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक जिम्मेदारी तय करने के बजाय एक-दूसरे पर जवाबदेही डालते रहे. हर बार आश्वासन मिला, लेकिन न तो स्पष्ट जवाब मिला और न ही प्रमाण पत्र जारी किया गया. उनका कहना है कि एक शोकाकुल परिवार को राहत देने के बजाय सरकारी तंत्र ने उन्हें दफ्तरों के चक्कर लगाने पर मजबूर कर दिया.

अस्पताल के रिकॉर्ड प्रबंधन पर भी उठे सवाल

परिवार ने आरोप लगाया कि अस्पताल में आवश्यक अभिलेखों का समुचित संधारण नहीं किया गया. यदि रिकॉर्ड व्यवस्थित रहते और प्रक्रिया समय पर पूरी होती तो आज उन्हें इस तरह परेशान नहीं होना पड़ता. उनका कहना है कि यह केवल एक परिवार की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली का गंभीर उदाहरण है.

कार्रवाई की मांग

पीड़ित परिवार ने मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा तत्काल मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की है. अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या व्यवस्था करते हैं.

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