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हजारीबाग: कोल ब्लॉक आवंटन के विरोध में ग्रामीणों का हुंकार, लोगों ने किया धरना-प्रदर्शन

Hazaribagh: केरेडारी प्रखंड में प्रस्तावित बुंडू कोल ब्लॉक और पाताल ईस्ट कोल ब्लॉक के आवंटन के विरोध में शुक्रवार को हजारों ग्रामीणों...

हजारीबाग
ग्रामीणों का हुंकार

Hazaribagh: केरेडारी प्रखंड में प्रस्तावित बुंडू कोल ब्लॉक और पाताल ईस्ट कोल ब्लॉक के आवंटन के विरोध में शुक्रवार को हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया. भूमि अधिकार एवं सामाजिक न्याय समिति के नेतृत्व में प्रखंड मुख्यालय परिसर में आयोजित एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन में जल-जंगल-जमीन, शिक्षा, भूमि अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय विकास से जुड़े कई मुद्दों को लेकर सरकार के समक्ष मांगें रखी गई.  धरना में हेंदेगीर, लोहरसा, बड़की मेड़ी, छोटकी मेड़ी, कोले, बुचाडीह, बुंडू, खपिया, बटुका, हफुआ, बराडीह, बन्हे, कारों, करमटांड़, मंडर सहित कई गांवों के हजारों ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए. कार्यक्रम की शुरुआत कराली चौक से विशाल पैदल मार्च के साथ हुई, हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर ग्रामीण पगार मोड़ व बेल चौक होते हुए प्रखंड मुख्यालय पहुंचे, जहां जनसभा आयोजित की गई.

‘शिक्षा अधिकार है, पुलिस कैंप हटे और स्कूल बने प्लस-टू’

सभा की अध्यक्षता समिति के मुख्य संरक्षक दर्शन गंझू ने की, जबकि संचालन श्रीकुमार ने किया. समिति के संयोजक विकास कुमार महतो ने कहा कि शिक्षा किसी सरकार की कृपा नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार है. उन्होंने आरोप लगाया कि हेंदेगीर हाई स्कूल परिसर में संचालित पुलिस कैंप के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है,  उन्होंने विद्यालय से पुलिस कैंप हटाने और स्कूल को प्लस-टू में उत्क्रमित करने की मांग की, ताकि आसपास के हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा का लाभ मिल सके.

कोल ब्लॉक आवंटन का किया कड़ा विरोध

सभा में वक्ताओं ने SM स्टील कंपनी लिमिटेड को आवंटित बुंडू कोल ब्लॉक और RCR स्टील लिमिटेड को आवंटित पाताल ईस्ट कोल ब्लॉक का कड़ा विरोध किया. उनका कहना था कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र घने वन और हाथी कॉरिडोर में स्थित है, जहां खनन शुरू होने से कोंती और मालादह समेत कई नदियों के अस्तित्व पर संकट पैदा होगा तथा पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचेगा. ग्रामीणों ने केंद्र और राज्य सरकार से दोनों कोल ब्लॉक के आवंटन को तत्काल रद्द करने की मांग की.

‘जंगल बचेंगे तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा’

आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. मिथिलेश कुमार दांगी ने कहा कि जिस तरह आज पानी बोतलों में बिक रहा है, उसी तरह यदि जंगलों की अंधाधुंध कटाई जारी रही तो भविष्य में ऑक्सीजन भी व्यापार की वस्तु बन जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा ही मानव जीवन की सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है।

भूमि रिकॉर्ड सुधार और पंचायतों को केरेडारी में शामिल करने की मांग

धरना के दौरान प्रत्येक पंचायत में विशेष शिविर लगाकर भूमि अभिलेखों की त्रुटियों के त्वरित सुधार, बाहरी लोगों की कथित अवैध भूमि बंदोबस्ती की जांच तथा उसे निरस्त करने की मांग उठाई गई।
किचटो और बचरा पंचायत के ग्रामीणों ने दोनों पंचायतों को हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड में शामिल करने की पुरानी मांग दोहराई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि इन पंचायतों के साथ विकास योजनाओं में लगातार भेदभाव किया जा रहा है।

समान विकास की उठी मांग

ग्रामीणों ने सभी पंचायतों में सरकारी योजनाओं का समान और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विकास का अधिकार प्रत्येक नागरिक का समान अधिकार है और किसी क्षेत्र की उपेक्षा स्वीकार नहीं की जाएगी.

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ज्ञापन सौंपा, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

धरना-प्रदर्शन के बाद समिति के प्रतिनिधिमंडल ने कोयला मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय, शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार समेत संबंधित विभागों के नाम ज्ञापन केरेडारी अंचलाधिकारी को सौंपा. सभा के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि जनहित से जुड़े इन मुद्दों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र की जनता चरणबद्ध और व्यापक लोकतांत्रिक जनआंदोलन को और तेज करेगी. धरना में विनोद गंझू, दिनेश गंझू, पाताल पंचायत की मुखिया नेहा लकड़ा, उपमुखिया अजय कुमार मुंडा, किचटो पंचायत की मुखिया संगीता देवी, अंगद महतो, प्रेम सुंदर लकड़ा, रूपलाल महतो, हीरा महतो, अनिल महतो, महेंद्र महतो, संजय मुंडा, करण मुंडा, नीतू कुमारी, रविशंकर जायसवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, वार्ड सदस्य एवं हजारों ग्रामीण मौजूद रहे.

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