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पहाड़ी मंदिर मामले में HC ने धार्मिक न्यास बोर्ड को जारी किया नोटिस, मांगा स्पष्टीकरण

Ranchi: पहाड़ी मंदिर की नई समिति के गठन एवं पूर्व की समिति को भंग किए जाने के मामले में दायर अवमानना याचिका...

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Ranchi: पहाड़ी मंदिर की नई समिति के गठन एवं पूर्व की समिति को भंग किए जाने के मामले में दायर अवमानना याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने सुनवाई करते हुए हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड को नोटिस जारी किया है. अदालत ने चार सप्ताह के भीतर पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है.

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में रखी दलील

सुनवाई के दौरान प्रार्थी पहाड़ी मंदिर विकास समिति की ओर से अधिवक्ता अभय मिश्रा और आद्या मिश्रा ने अदालत को बताया कि पहले पहाड़ी मंदिर विकास समिति में रांची के डीसी, एसएसपी और एसडीओ जैसे प्रशासनिक अधिकारी अध्यक्ष और सदस्य के रूप में शामिल रहते थे. लेकिन बाद में उन्हें हटाकर राजनीतिक कार्यकर्ताओं को समिति में शामिल कर मंदिर का राजनीतिकरण किया जा रहा है. वर्तमान समिति को बोर्ड ने सुनवाई का मौका नहीं दिया और बिना उचित कारण बताए ही समिति को भंग कर दिया है.

नई समिति के गठन पर उठे सवाल

अदालत को बताया गया कि हाई कोर्ट पूर्व में समिति को भंग करने संबंधी कार्रवाई को निरस्त कर चुका है. इसके बाद भी फिर से नई कमेटी का गठन कर दिया गया. अधिवक्ता ने अदालत को यह भी बताया कि इस बार समिति में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को भी शामिल किया गया है. बाकी सदस्य राजनीतिक ही हैं. ऐसे में यह पूरी प्रक्रिया कोर्ट के पूर्व आदेशों का उल्लंघन है. अदालत से आग्रह किया गया कि नई समिति को मंदिर पर कब्जा करने से रोका जाए.

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कोर्ट ने जारी किया नोटिस

इस पर कोर्ट ने हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है. मामले में अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद रखी गई है.

अवमानना याचिका में क्या कहा गया

बता दें कि झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से जारी अधिसूचना को चुनौती देते हुए पहाड़ी मंदिर विकास समिति ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाई कोर्ट ने पूर्व में संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बाद भी न्यास बोर्ड ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए समिति को भंग कर नई समिति का गठन कर दिया. याचिका में कहा गया है कि न्यास बोर्ड की ओर से जारी अधिसूचना तथ्यहीन, एकतरफा और कानून के विपरीत है और यह हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है.

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