NewsWave Desk : अरूणाचल प्रदेश की बॉर्डर से 50 किलोमीटर की दूरी पर चीन मेगा हाइड्रोपावर डैम बना रहा है. चीन ये डैम तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर बना है. जिस पर भारत भी नजर बनाये हुए है. हालांकि इसे लेकर चीन में भी विरोध शुरू हो गया है. वहीं, चीन के वैज्ञानिकों ने भी शी जिनपिंग सरकार को चेतावनी दी है कि इस डैम के बनने से चीन, तिब्बत और भारत में भूकंप और लैंड स्लाइड का खतरा बढ़ सकता है. जानकारी हो कि त्सांगपो नदी भारत में ब्रह्मपुत्र नदी के नाम से जानी जाती है. चीन के इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट के अनुसार त्सांगपो नदी के निचले हिस्से पर हाइड्रोपावर डैम कम कार्बन-उत्सर्जन वाला ग्रीन प्रोजेक्ट है. इसमें नदी के प्रचुर जल ऊर्जा संसाधन से आसपास के इलाके में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा का विकास बढ़ाया जाएगा. साथ ही स्वच्छ ऊर्जा के आधार का निर्माण किया जाएगा. इस योजना के बाद बिजली, परिवहन, जल संरक्षण जैसे प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर होने की बात की गयी है. हालांकि वैज्ञानिक इस प्रोजेक्ट को क्लाइमेट थ्रेट बता रहे है.
भारत करता रहा है विरोध
भारत ने ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की गतिविधियों को लेकर चिंता व्यक्त की है. भारत ने इस प्रोजेक्ट के संदर्भ में कई बार कहा है कि इससे जल सुरक्षा, मौसम पर असर और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा पैदा हो सकता है. पिछले दिनों चीनी सरकारी की चाइना जियोलॉजिकल सर्वे का रिसर्च पत्रिका सेडिमेंट्री जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी में प्रकाशित किया गया. जिसमें बताया गया कि पाइझेन फॉल्ट की भूकंपीय दरार ठीक उसी जगह से गुजरती है जहां इस हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का निर्माण किया जा रहा है.

जमीन के नीचे की चट्टानें टूट चुकी है
वैज्ञानिकों के अनुसार पाइझेन फॉल्ट बांधों, सड़कों, पुलों और सुरंगों सहित आसपास के स्ट्रक्चर की स्थिरता पर बड़ा प्रभाव डालेगा. यहां जमीन के नीचे दरार की वजह से आस-पास की चट्टानें टूट चुकी है. और यह बेहद कमजोर हो चुकी है. कमजोर चट्टान के कारण बांध का पिलर वजन संभाल नहीं सकता और उसकी मजबूती खतरे में पड़ सकती है. इस वजह से किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के टूटने या ढहने का जोखिम बहुत ज्यादा बढ़ जाता है.
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