Palamu: जिले के सतबरवा प्रखंड स्थित मुरमा मलय डैम की मुख्य नहर (बड़ा कैनाल) टूट जाने के कारण इस बार 105 गांवों के किसानों के खेतों तक पानी पहुंचना मुश्किल नजर आ रहा है. पिछले साल दिसंबर 2025 में ही इस डैम का एक बड़ा हिस्सा टूट गया था, लेकिन जल संसाधन विभाग की घोर संवेदनहीनता के कारण अब तक इसकी मरम्मत नहीं कराई जा सकी है. खरीफ फसल का सीजन शुरू होने और बारिश का समय आने के बावजूद नहर की सुध न लिए जाने से स्थानीय किसानों में भारी आक्रोश है. परेशान ग्रामीणों और किसानों ने अब प्रशासन के खिलाफ आर-पार के आंदोलन की चेतावनी दी है.
विभाग ने पाइप लगाकर की खानापूर्ति
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, मुरमा गांव के पास स्थित गेट संख्या 13 के समीप पिछले साल दिसंबर महीने में यह नहर अचानक टूट गई थी, जिससे डैम का लाखों गैलन पानी बहकर बर्बाद हो गया था. उस वक्त जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सिर्फ खानापूर्ति की और एक पतली पाइप लगाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया. यह अस्थाई व्यवस्था खेतों तक पानीपहुंचाने के लिए कतई पर्याप्त नहीं है. स्थानीय ग्रामीण प्रदीप सिन्हा का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर विभाग के आला अधिकारियों से लेकर क्षेत्र के सांसद और विधायक तक को गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन टूटी नहर को दोबारा मुकम्मल तरीके से बनाने के लिए किसी ने भी कोई ठोस पहल नहीं की.

1982 से किसानों की लाइफलाइन है डैम
मलय डैम का इतिहास पलामू की खेती-किसानी से गहराई से जुड़ा है. वर्ष 1982 में बने इस डैम की नहरों की मरम्मत और पक्कीकरण का काम पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर किया गया था. इस डैम के पानी पर सतबरवा, मेदिनीनगर सदर और लेस्लीगंज प्रखंड के करीब 105 गांवों के किसान पूरी तरह निर्भर हैं. नहर टूट जाने से पुरुषों के साथ-साथ महिला किसान भी बेहद चिंतित हैं. महिला किसान सुजानती देवी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि अगर नहर से पानी नहीं मिला, तो इस बार खेतों में बिचड़ा डालना और धान की रोपनी करना नामुमकिन हो जाएगा.समझ नहीं आ रहा कि परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा.
इंजीनियर का जल्द निर्माण का आश्वासन
इस पूरे मामले पर जब जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता सुनील बरुआ से बात की गई, तो उन्होंने टेलीफोन पर आश्वासन दिया कि टूटे हुए नहर के हिस्से का निर्माण जल्द ही शुरू कराया जाएगा. हालांकि, विभाग के इस ‘जल्द’ वाले रवैये पर किसानों को भरोसा नहीं है. स्थानीय ग्रामीण अरुण कुमार का कहना है कि अगर मानसून की भारी बारिश से पहले इस नहर का पक्का निर्माण नहीं हुआ, तो 105 गांवों के किसानों के सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी. पलामू का सतबरवा इलाका अपनी उन्नत खेती के लिए जाना जाता है और मलय डैम यहां की जीवनरेखा है. ऐसे में समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो इस साल पलामू के एक बड़े हिस्से में कृषि व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी.
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