Ranchi: झारखंड पुलिस साइबर अपराध के द्वारा ठगे गए आम लोगों के लिए पहल की है. साइबर अपराधी के द्वारा ठगी करने के बाद पीड़ित व्यक्ति बैंक में शिकायत करते हैं. जिसके बाद खातों को फ्रिज कर दिया जाता है. झारखंड पुलिस साइबर अपराध जांच के दौरान फ्रीज या होल्ड किए गए बैंक खातों की समस्याओं से आम जनता और व्यापारियों को निजात दिलाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है.
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने एक नया ऑनलाइन पोर्टल जीआरएम (Grievance Redressal Module) शुरू किया है. इसका मुख्य उद्देश्य प्रभावित निर्दोष खाताधारकों को एक पारदर्शी, ऑनलाइन और समयबद्ध शिकायत निवारण प्रणाली प्रदान करना है. अक्सर साइबर धोखाधड़ी की जांच के दौरान संदिग्ध खातों को फ्रीज या होल्ड कर दिया जाता है. इस प्रक्रिया में कई बार निर्दोष व्यक्तियों, व्यापारियों या कंपनियों के वैध खाते भी ब्लॉक हो जाते हैं. राहत पाने के लिए लोगों को बैंक और पुलिस स्टेशनों के बार-बार चक्कर काटने पड़ते थे। इसी जटिल समस्या को समाप्त करने के लिए GRM पोर्टल का गठन किया गया है.

आम लोगों को मिलेंगे ये लाभ
इस नई व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी हो जाएगी. पुलिस, बैंक और नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, जिससे निर्दोष खाताधारकों को मानसिक और आर्थिक रूप से शीघ्र राहत मिलेगी और उन्हें दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने.
किसी भी तकनीकी सहायता या जानकारी के लिए आम लोग साइबर अपराध थाना, रांची से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, व्हाट्सएप नंबर 8987790674 या ईमेल cybercell-ranchi@jhpolice.gov.in पर भी संपर्क किया जा सकता है.
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