Ranchi : झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम ने अपने वित्तीय कामकाज में आमूलचूल परिवर्तन करने का बड़ा फैसला लिया है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी खजाने के दुरुपयोग को रोकना और वित्तीय कुप्रबंधन के हर रास्ते को बंद करना है. निगम मुख्यालय में होने वाले हर एक पैसे के लेन-देन, भुगतान और बही-खातों की अब कड़ी निगरानी होगी. इसके लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट और कॉस्ट अकाउंटेंट फर्मों की सेवाएं ली जा रही है. जो सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितताओं पर पैनी नजर रखेंगे. निगम का स्पष्ट कहना है कि जनता का पैसा और सरकारी कोष का उपयोग पूरी तरह से ईमानदारी और नियमों के दायरे में होना चाहिए.
सुधार की दिशा में निगम का सख्त कदम
प्रबंध निदेशक रंजीता टोप्पो के नेतृत्व में प्रशासन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए निगरानी ढांचा तैयार किया है. इसके तहत विभाग के हर स्तर पर वित्तीय उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाएगा. वित्तीय कुप्रबंधन को रोकने के लिए एक मजबूत निवारक प्रणाली विकसित किया जाएगा. रिकॉर्ड प्रबंधन में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय धांधली या रिकॉर्ड में विसंगति पाए जाने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

क्या है नई व्यवस्था की मंशा
• किसी भी भुगतान से पहले सभी वाउचरों और वित्तीय दस्तावेजों की विस्तृत जांच होगी.
• टैली और कैशबुक में दर्ज होने वाली हर एक प्रविष्टि की भौतिक सत्यापन के साथ जांच की जाएगी.
• निगम में चल रही पुरानी कार्यप्रणाली को दुरुस्त कर उसे अत्याधुनिक और डिजिटल मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा ताकि भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो.
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