Ranchi: झारखंड के औद्योगिक विकास और युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने की दिशा में सरकार एक योजना की शुरू करने जा रही है. राज्य के सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) की सूरत और सीरत अब पूरी तरह बदलने वाली है. सरकार ने उद्योग जगत की भागीदारी के साथ आइटीआइ को हाई-टेक और ‘स्टेट-ऑफ-द-आर्ट’ स्किलिंग सेंटर्स के रूप में अपग्रेड करने का फैसला किया है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जहां से निकलने वाले युवा सीधे कंपनियों की जरूरतों के अनुसार तैयार हों.
वित्तीय सुरक्षा और सरकार का नियंत्रण
निजी हाथों में कमान देने के बावजूद, सरकारी संपत्तियों और जनहित की रक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकार के पास कुछ विशेष अधिकार सुरक्षित रहेंगे, जिन्हें ‘रिजर्व्ड मैटर्स’ कहा गया है. बिना सरकार की लिखित अनुमति के SPV ITI की जमीनों या संपत्तियों को बेचना, लीज पर देना या ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे. कंपनी के मूल ढांचे, नियमों या शेयरहोल्डिंग पैटर्न में बदलाव नहीं क सकेंगे, तय बजट और ‘स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टमेंट प्लान’ से बाहर जाकर बड़ा खर्च या कर्ज नहीं ले सकेंगे.

स्थानीय उद्योगों से जुड़ाव
झारखंड में मौजूद माइनिंग, ऑटोमोबाइल, स्टील और हैवी इंजीनियरिंग कंपनियों को एंकर पार्टनर के रूप में जोड़ा जा सकेगा। इससे स्थानीय युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिल जाएगा. बोर्ड में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य करने के साथ-साथ ऐसे सेक्टर्स के कोर्सेज को बढ़ावा दिया जाएगा, जहां महिलाओं के लिए रोजगार की बेहतर संभावनाएं हैं.
पायलट प्रोजेक्ट से होगी लॉन्चिंग
पहले चरण में देश भर में केवल 20 से 25 हब-एंड-स्पोक क्लस्टर को शामिल करके इस मॉडल को परखा जाएगा. इस पायलट प्रोजेक्ट से मिलने वाले अनुभवों और सुधारों के आधार पर ही इसे पूरे देश और झारखंड के अन्य सभी सरकारी आइटीआइ में लागू किया जाएगा.
क्या है हब-एंड-स्पोक मॉडल
इस पूरी योजना को बहुत ही व्यावहारिक तरीके से डिजाइन किया गया है. इसके तहत देश भर के 1,000 सरकारी आइटीआइ को आपस में जोड़ा जाएगा, जिसमें झारखंड के संस्थान भी शामिल होंगे.
• हब आइटीआइ: कुल 200 मुख्य आइटीआइ को हब बनाया जाएगा. इन हब संस्थानों में अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक मशीनें और उन्नत प्रयोगशालाएं होंगी.
• स्पोक आइटीआइ: प्रत्येक हब आइटीआइ के तहत औसतन 4 ‘स्पोक आइटीआइ काम करेंगे. इस तरह कुल 800 आइटीआइ को स्पोक के रूप में विकसित किया जाएगा.
• साझा संसाधन: स्पोक आइटीआइ के छात्र और ट्रेनर उन्नत ट्रेनिंग और मशीनों के इस्तेमाल के लिए अपने मुख्य हब आइटीआइ की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे.
नए और आधुनिक कोर्सेज
• नए कोर्सेज की एंट्री: हब आइटीआइ में औसतन 4 नए और स्पोक आइटीआइ में 2 नए आधुनिक कोर्सेज शुरू किए जाएंगे. ये कोर्सेज इंडस्ट्री 4.0, डिजिटल टेक्नोलॉजी और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग पर आधारित होंगे.
• पुराने कोर्सेज का कायाकल्प: हब आइटीआइ के 10 और स्पोक आइटीआइ के 8 पुराने कोर्सेज को अपग्रेड किया जाएगा. जो पारंपरिक कोर्सेज आज भी मांग में हैं, उन्हें आधुनिक तकनीक और नए सिलेबस के साथ जोड़ा जाएगा.
• शॉर्ट-टर्म प्रोग्राम: नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट के अलावा अब आइटीआइ में 3 से 6 महीने के शॉर्ट-टर्म कोर्सेज, डिप्लोमा और कामकाजी पेशेवरों के लिए ‘एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम’ भी चलाए जाएंगे.
• सर्विस सेक्टर पर फोकस: जिन इलाकों में भारी उद्योग नहीं हैं, वहां सर्विस सेक्टर, मल्टी-स्किल और आजीविका संवर्धन से जुड़े कोर्सेज को प्राथमिकता दी जाएगी.
एसपीवी मॉडल: कंपनियों के हाथों में होगी कमान
• इंडस्ट्री-लेड मॉडलः यह सबसे प्राथमिक मॉडल होगा. इसमें किसी प्रतिष्ठित बड़ी कंपनी या पीएसयू को एंकर इंडस्ट्री पार्टनर बनाया जाएगा.
• स्वामित्व: इस एसपीवी में निजी कंपनी की हिस्सेदारी 51% होगी, जबकि केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 49% (दोनों की आधी-आधी) होगी.
• स्वायत्तता: इस मॉडल में कंपनी को कोर्स चुनने, नया सिलेबस बनाने, ट्रेनर्स की भर्ती करने और वित्तीय फैसले लेने की पूरी आजादी होगी.
स्टेट-लेड मॉडल
• स्वामित्व: इसमें राज्य सरकार की हिस्सेदारी 51% (बहुमत) होगी.
• उद्योगों का साथ: इस मॉडल में भी उद्योगों की कम से कम 17% की वित्तीय भागीदारी और प्लेसमेंट पार्टनरशिप अनिवार्य होगी.
• शुरुआती पूंजी: प्रत्येक एसपीवी की शुरुआत 1,00,000 रुपये (एक लाख रुपये) की शुरुआती शेयर पूंजी के साथ होगी, जिसमें सभी हिस्सेदार अपनी हिस्सेदारी के अनुसार योगदान देंगे.
कैसा होगा बोर्ड और प्रबंधन का ढांचा
• बोर्ड में कुल 11 डायरेक्टर्स होंगे, जिनमें कम से कम 2 महिला डायरेक्टर्स का होना अनिवार्य है.
• सरकार की सहमति से एंकर इंडस्ट्री पार्टनर द्वारा चेयरपर्सन मनोनीत किया जाएगा.
• एंकर पार्टनर के 4 सदस्य, केंद्र सरकार के 2 नॉन-एग्जीक्यूटिव सदस्य, राज्य सरकार के 2 नॉन-एग्जीक्यूटिव सदस्य, आइटीआइ लीडरशिप से 1 सदस्य और संस्था का मुख्य कार्यकारी अधिकारी इसमें शामिल होंगे.
• बोर्ड द्वारा पूरी तरह से योग्यता के आधार पर एक फुल-टाइम सीइओ की नियुक्ति की जाएगी, जो रोजमर्रा के प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों को संभालेगा.


