Ranchi : झारखंड के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है. लंबे समय से चली आ रही विसंगतियों को दूर करते हुए, झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने अब सख्त रुख अपना लिया है. अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेशों का पालन करते हुए, आयोग ने डीवीसी DVC को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह 01 अप्रैल 2027 से अपने कार्यों का पूर्ण बंटवारा करें और झारखंड में अपने वितरण नेटवर्क को पूरी तरह पारदर्शी बनाए.
आयोग का दो-टूक आदेश : अब नहीं चलेगा घालमेल
आयोग ने स्पष्ट किया है कि डीवीसी DVC को अब अपनी कुल संपत्तियों का ब्यौरा देना ही होगा. इसे तीन स्पष्ट भागों में विभाजित करना अनिवार्य है. जिसमें बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण शामिल है.

क्या दिया गया है निर्देश
• आयोग ने डीवीसी DVC को निर्देश दिया गया है कि वह भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के परामर्श से अपने खातों को अलग-अलग करें, ताकि राज्य के उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले बिजली बिल का वास्तविक आंकलन हो सके.
• डीवीसी DVC को नेटवर्क के सभी तत्वों और उनकी लागत का विवरण 45 दिनों के भीतर सौंपना होगा.
• यह पूरी कवायद 01 अप्रैल 2027 से लागू होने वाली ‘कॉस्ट ऑफ सर्विस’ आधारित टैरिफ नीति को लागू करने के लिए की जा रही है.
• आयोग ने स्पष्ट कहा है कि पहचान की गई संपत्तियों की जानकारी केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग को भी भेजी जाएगी, ताकि टैरिफ में उचित समायोजन हो सके.
• आयोग ने अपीलेट के निर्देशानुसार, झारखंड में मौजूद डीवीसी DVC की वितरण संपत्तियों की पहचान के लिए किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ एजेंसी या केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की मदद लेने का निर्णय लिया है.
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