Hazaribagh : देश के कोयला खनन क्षेत्र में पहली बार अंतरिक्ष आधारित निगरानी व्यवस्था को बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा. कोल इंडिया लिमिटेड CIL और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर NRSC के बीच हुए इस संबध में समझौता हुआ है. जिसके बाद अब झारखंड समेत देश की प्रमुख कोयला खदानों की निगरानी सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI तकनीक के जरिए की जाएगी. इस पहल का उद्देश्य खनन गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग, अवैध खनन पर रोक, पर्यावरण संरक्षण और खदान क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना है.
अवैध खनन पर लगेगी लगाम
अब तक कोयला क्षेत्रों की निगरानी मुख्य रूप से ड्रोन, फील्ड निरीक्षण और प्रशासनिक रिपोर्टों के आधार पर होती थी. नई प्रणाली में उच्च-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट चित्रों और एआई AI आधारित विश्लेषण से किसी भी अनधिकृत खनन गतिविधि की शीघ्र पहचान संभव होगी. इससे अवैध उत्खनन, अतिक्रमण और भूमि उपयोग में बदलाव पर समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी.
तैयार होगा जियोस्पेशियल डैशबोर्ड
समझौते के तहत एक आधुनिक जियोस्पेशियल डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा. जिसमें सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर खदानों की स्थिति, उत्पादन क्षेत्र, हरित आवरण, पुनर्वास कार्य, भूमि सुधार और पर्यावरणीय बदलाव की डिजिटल निगरानी की जाएगी. यह डैशबोर्ड कोल इंडिया के विभिन्न क्षेत्रों को एकीकृत निगरानी प्रणाली उपलब्ध कराएगा.
झरिया की आग और भू-धंसान पर विशेष फोकस
झारखंड के झरिया कोयला क्षेत्र में दशकों से भूमिगत आग और भू-धंसान गंभीर समस्या बनी हुई है. नई तकनीक के माध्यम से इन प्रभावित क्षेत्रों का नियमित अध्ययन, मानचित्रण और जोखिम का आंकलन किया जाएगा. सैटेलाइट डेटा और एआई AI विश्लेषण से यह पता लगाया जा सकेगा कि किन क्षेत्रों में आग फैल रही है या भू-धंसान का खतरा बढ़ रहा है. जिससे समय रहते सुरक्षा और पुनर्वास की कार्रवाई संभव होगी. इससे पहले भी बीसीसीएल BCCL ने एनआरएससी NRSC से झरिया अग्नि प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन कराया था.
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
नई प्रणाली केवल खनन गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगी. इसके माध्यम से खदान बंद होने के बाद किए जा रहे वनीकरण, हरित आवरण, भूमि पुनर्स्थापन और पुनर्वास कॉलोनियों के विकास की भी नियमित निगरानी होगी. इससे पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और सतत खनन को बढ़ावा मिलेगा.
कोल इंडिया के डिजिटलीकरण अभियान को मिलेगी गति
कोल इंडिया लगातार डिजिटल तकनीकों, ड्रोन सर्वेक्षण, जीआईएस GIS मैपिंग और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को बढ़ावा दे रही है. इसरो ISRO के साथ हुआ यह समझौता उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि सैटेलाइट आधारित निगरानी से उत्पादन क्षमता, सुरक्षा, पारदर्शिता और पर्यावरण प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार होगा.
झारखंड को होगा सबसे अधिक लाभ
देश के सबसे बड़े कोयला उत्पादक राज्यों में शामिल झारखंड में बीसीसीएल BCCL, सीसीएल CCL और ईसीएल ECL जैसी कंपनियां बड़े पैमाने पर खनन कार्य करती है. ऐसे में इस नई तकनीक का सबसे अधिक लाभ झरिया, धनबाद, रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चतरा और उत्तरी कर्णपुरा जैसे कोयला क्षेत्रों को मिलने की उम्मीद है. जहां अवैध खनन, भू-धंसान और पर्यावरणीय चुनौतियां लंबे समय से चिंता का विषय रही है.
