हजारीबाग: 294 एकड़ के प्लॉट पर मालिकाना हक को लेकर छिड़ा भारी विवाद, संस्थान की पक्की बाउंड्री ढहाने पर बढ़ा तनाव

Hazaribagh: मुफस्सिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मौजा गुड़वा में एक विशाल भूखंड को लेकर पिछले कई वर्षों से सुलग रहा...

294 एकड़ के प्लॉट पर मालिकाना हक को लेकर छिड़ा भारी विवाद

Hazaribagh: मुफस्सिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मौजा गुड़वा में एक विशाल भूखंड को लेकर पिछले कई वर्षों से सुलग रहा विवाद अब पूरी तरह भड़क उठा है. यहाँ खाता संख्या 2 और प्लॉट संख्या 632 के अंतर्गत आने वाली करोड़ों रुपये मूल्य की 24 एकड़ 52 डिसमिल जमीन पर मालिकाना हक को लेकर दशकों पुराने एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान और स्थानीय ग्रामीण किसान आमने-सामने आ गए हैं. संस्थान द्वारा अपनी सुरक्षा के लिए पूर्व में किए गए तार के घेरे के स्थान पर पक्की बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जा रहा था, जिसे ग्रामीणों ने अदालती आदेश का उल्लंघन बताते हुए बलपूर्वक ढहा दिया. घटना के बाद इलाके में भारी तनाव को देखते हुए सदर अंचल अधिकारी आशुतोष कुमार भारी पुलिस बल और अंचल के सरकारी अमीनों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर तत्काल प्रभाव से काम रुकवा दिया.

‘जंगली हाथियों से सुरक्षा के लिए बना रहे थे दीवार, ग्रामीणों ने लेबरों को भगाया’ -फादर जेम्स

विवाद के केंद्र में आए स्थानीय संस्थान के प्रमुख फादर जेम्स ने इस पूरी घटना को संस्थान की सुरक्षा पर बड़ा हमला करार दिया है. उन्होंने बताया कि इस परिसर में वर्ष 1954 से एक मिडिल स्कूल और 1958 से टीचर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का निर्बाध संचालन हो रहा है. फादर जेम्स के अनुसार, लगभग 30 एकड़ का यह पूरा परिसर पिछले 70 वर्षों से अधिक समय से संस्थान के ही वैध अधीन और कब्जे में रहा है. उन्होंने कहा, “विगत वर्षों में फंड की कमी के कारण इस संवेदनशील हिस्से में पक्की बाउंड्री नहीं हो सकी थी. चूकि इस इलाके में अक्सर जंगली हाथियों का भारी झुंड आता है, इसलिए बच्चों और संस्थान की सुरक्षा हेतु जब पक्की दीवार का काम शुरू किया गया, तो ग्रामीणों ने क्रूरता दिखाते हुए निर्माण को ध्वस्त कर दिया और मजदूरों के साथ गाली-गलौज कर उन्हें भगा दिया. हमारे पास बी.एन.एस.एस. की धारा 163 का आदेश, सीओ और पुलिस की अनुकूल रिपोर्ट है. विपक्षी जिस 24 एकड़ का दावा कर रहे हैं, उसका हमारे परिसर से कोई लेना-देना नहीं है.”

‘सीओ, एसी और डीसी को दिए 100 आवेदन, पर नहीं मिला इंसाफ’-इदरीस अंसारी

दूसरी ओर, अपनी पैतृक कृषि भूमि को बचाने के लिए लामबंद ग्रामीणों का नेतृत्व कर रहे सखिया गांव निवासी इदरीस अंसारी ने संस्थान के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए उसे भू-माफिया सरीखा कदम बताया. इदरीस अंसारी ने 1938 से अपने पूर्वजों के काबिज होने का साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि सिविल कोर्ट के सेकंड एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज द्वारा पारित ‘टाइटल अपील नंबर 24/76’ के ऐतिहासिक जजमेंट के तहत यह 24.52 एकड़ जमीन जिबलाल महतो और नूर मोहम्मद आदि के नाम पर कानूनी रूप से स्वीकृत है. इसके अलावा वन विभाग ने भी 12 अगस्त 1965 को (ज्ञापांक 5227) इस भूमि को उनके पक्ष में रिलीज किया था. अंसारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “फादर जेम्स ने रातों-रात हमारे द्वारा घेरा गया तार चुरा लिया, जिसकी बात उन्होंने थाने में भी कबूल की थी. हमने अपनी जमीन की रक्षा के लिए ट्रेंच काटा था, पर ये लोग उस पर भी कब्जा कर रहे हैं. हमने न्याय के लिए डीसी, एसपी और सीओ को 100 से अधिक आवेदन दिए, लेकिन प्रशासन की चुप्पी के कारण आज हमें खुद अपनी जमीन बचाने सड़क पर उतरना पड़ा.”

कुल रकबा 294 एकड़, वास्तविक लोकेशन की पहचान करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती

मौके पर दोनों पक्षों के दस्तावेजों का गहनता से अवलोकन करने के बाद सदर सीओ आशुतोष कुमार ने बताया कि यह पूरा मामला बेहद पेचीदा और तकनीकी है. सीओ ने स्पष्ट किया कि जिस प्लॉट नंबर 632 पर यह पूरा विवाद केंद्रित है, उसका कुल रकबा 294 एकड़ का एक विशाल भूखंड है. ग्रामीणों के पास निसंदेह फॉरेस्ट विभाग द्वारा साढ़े चौबीस एकड़ जमीन रिलीज किए जाने के पुराने कागजात मौजूद हैं, लेकिन इतने बड़े रकबे में वह विशिष्ट साढ़े चौबीस एकड़ का टुकड़ा ठीक इसी स्थान पर है या कहीं और, इसका निर्धारण किया जाना अभी बाकी है. सीओ ने कड़ा रुख अपनाते हुए अंचल के सरकारी अमीन और फारेस्ट विभाग के अमीन को संयुक्त रूप से पूरे नक्शे की वैज्ञानिक पैमाइश करने का निर्देश दिया है. उन्होंने दोनों पक्षों को कड़ी चेतावनी दी है कि जब तक प्रशासन किसी अंतिम विधिक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच जाता, तब तक कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार का नया न्यूसेंस या अशांति उत्पन्न करने की कोशिश न की जाए, अन्यथा दोनों पक्षों पर सुसंगत धाराओं में जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी.

ALSO READ : झारखंड के सरकारी सोलर प्लांटों की बदलेगी सूरत, 5 साल तक 24 घंटे मिलेगी बिजली, 3 दिन में खराबी दूर नहीं हुई तो रोज 1000 रुपये जुर्माना, लापरवाह ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *