Koderma: सदर अस्पताल, कोडरमा में वित्तीय कार्यों में गंभीर अनियमितता और संभावित घोटाले का मामला सामने आया है. कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रकाश रजक ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. ज्ञापन में कहा गया है कि वित्त विभाग और मुख्य सचिव के निर्देश पर वित्तीय अनियमितताओं पर रोक के लिए लेखा लिपिकों का स्थानांतरण किया गया था. इसी क्रम में सदर अस्पताल के लेखा लिपिक रूपेश कुमार का भी स्थानांतरण हुआ. सिविल सर्जन ने 16 मई 2026 को आदेश जारी कर 19 मई तक संपूर्ण प्रभार हस्तांतरित कर निर्मुक्त करने का निर्देश दिया था. लेकिन आरोप है कि निर्मुक्त होने के बावजूद रूपेश कुमार द्वारा 22 मई से 15 जून 2026 के बीच लगभग 30 लाख रुपये से अधिक की भुगतान फाइलों का निष्पादन किया गया. इन भुगतानों को RTGS/NEFT के माध्यम से विभिन्न एजेंसियों और व्यक्तियों के खातों में भेजने के लिए बैंक को पत्र भी भेजे गए. जबकि उस अवधि में वित्तीय कार्य का अधिकार नए प्रभारधारी के पास होना चाहिए था. शिकायतकर्ता ने इसे सरकारी वित्तीय नियमों का खुला उल्लंघन बताया है. आरोप है कि संपूर्ण प्रभार हस्तांतरित किए बिना ही रूपेश कुमार को अंतिम वेतन प्रमाण पत्र LPC जारी कर दिया गया. नियमतः पूर्ण प्रभार हस्तांतरण के बाद ही LPC दिया जाता है. मामला यहीं नहीं रुका. ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि स्थानांतरित कर्मी सुजीत कुमार ने डोमचांच से निर्मुक्त होने के बाद वहां वेतन निकासी की और सदर अस्पताल में योगदान के बाद यहां भी वेतन लिया. एक ही अवधि में दो जगहों से वेतन लेना गंभीर वित्तीय अनियमितता है. इसके अलावा स्थानांतरित कर्मियों द्वारा निर्गम पंजी और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख भी नए प्रभारधारी को नहीं सौंपे गए. इससे सरकारी अभिलेखों की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.
करोड़ों की अनियमितता का अंदेशा
विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से ज्ञापन में कहा गया है कि मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना, आयुष्मान भारत योजना और अन्य मदों में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं. यदि पिछले दो वर्षों के भुगतान, सामग्री क्रय और बैंक लेन-देन की निष्पक्ष जांच हो तो करोड़ों की अनियमितता सामने आ सकती है.

5 सूत्री मांग
जिला अध्यक्ष ने डीसी से मांग की है:
- पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए.
- 22 मई से 15 जून के बीच हुए सभी RTGS/NEFT भुगतानों का बैंक रिकॉर्ड के साथ फॉरेंसिक ऑडिट हो.
- बिना प्रभार हस्तांतरण LPC जारी करने और स्थानांतरित कर्मी से काम कराने वालों की जिम्मेदारी तय हो.
- पिछले 2 वर्षों में मुख्यमंत्री योजना, आयुष्मान भारत सहित सभी योजनाओं का स्पेशल ऑडिट कराया जाए.
- जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों की वित्तीय शक्तियां वापस ली जाएं और दोषियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई हो.
प्रकाश रजक ने कहा कि सरकारी धन जनता की गाढ़ी कमाई है. इस तरह की अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे.

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