Hazaribagh: जिला समेत रांची और धनबाद के औद्योगिक व सीमावर्ती इलाकों में इन दिनों गो-तस्करी का एक बेहद संगठित और खतरनाक खेल चल रहा है. इस अवैध कारोबार के पीछे किसी आम अपराधी का हाथ नहीं, बल्कि एक ऐसे सिंडिकेट का नाम सामने आ रहा है जिसके तार कथित रूप से राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक गलियारों तक जुड़े हुए हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे रैकेट का मुख्य सरगना हजारीबाग का ही रहने वाला गो-तस्करी का माफिया अकिल खान है. पश्चिम बंगाल के रूटों पर कानूनी कड़ाई होने के बाद अकिल खान ने झारखंड को अपना मुख्य केंद्र बना लिया है. तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम राजनैतिक संरक्षण का दावा करते हुए पुलिस और प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं.
सत्ता के गलियारों में बैठे ‘आका‘ दे रहे हैं संरक्षण!
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप अकिल खान के भांजे शहबाज पर लग रहे हैं. सूत्रों का दावा है कि शहबाज कथित तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत है और वहीं से इस पूरे सिंडिकेट की मॉनिटरिंग करता है. आरोप है कि वह ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर पुलिसिया कार्रवाई को रोकता है और तस्करों की गाड़ियों को सुरक्षित रास्ता मुहैया कराता है. सिंडिकेट से जुड़े गुर्गों का साफ कहना है कि जब तक वर्तमान सरकार का संरक्षण उन्हें प्राप्त है, तब तक कोई भी एजेंसी या पुलिस बल उनके इस नेटवर्क को ध्वस्त नहीं कर सकता. इस विस्मयकारी रसूख के कारण स्थानीय पुलिस भी इन मामलों में हाथ डालने से कतरा रही है.
बरही में मजहर कुरैशी की तैनाती, जीटी रोड पर अकिल का कब्जा
इस सिंडिकेट का जमीनी नेटवर्क भी बेहद चाक-चौबंद है. झारखंड की सीमा यानी बरही बॉर्डर पर इस काम को अंजाम देने की जिम्मेदारी बरही निवासी मजहर कुरैशी को सौंपी गई है. मजहर कुरैशी प्रतिदिन बॉर्डर पर मुस्तैद रहकर गो-तस्करों के वाहनों को बिना किसी कानूनी अड़चन के पार कराने का जिम्मा संभालता है. वहीं, ग्रैंड ट्रंक रोड पर अकिल खान का खुद का नेटवर्क सक्रिय है, जो गाड़ियों की आवाजाही की पल-पल की रिपोर्ट रखता है. इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद अब स्थानीय स्तर पर खुफिया एजेंसियां और पुलिस के आला अधिकारी इस पूरे सिंडिकेट के वित्तीय स्रोतों और कॉल डिटेल्स की जांच में जुटने की तैयारी कर रहे हैं.
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