Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 की टीजीटी (Trained Graduate Teacher) नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सैकड़ों शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि उन्हें वर्ष 2019 में हुई प्रारंभिक नियुक्तियों की तिथि से काल्पनिक (Notional) नियुक्ति का लाभ दिया जाए. अदालत ने कहा कि नियुक्ति में हुई देरी के लिए शिक्षक जिम्मेदार नहीं थे, इसलिए उन्हें इसका नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा.
शिक्षकों की मांग
न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने W.P.(S) No. 2049/2025 समेत कई समान याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. सभी याचिकाएं वर्ष 2016 के JSSC विज्ञापन संख्या 21/2016 के तहत नियुक्त टीजीटी शिक्षकों से संबंधित थीं. शिक्षकों ने मांग की थी कि उनकी नियुक्ति में सरकारी स्तर पर हुई देरी का खामियाजा उन्हें न भुगतना पड़े और उन्हें उसी तिथि से वरिष्ठता व अन्य सेवा लाभ दिए जाएं, जिस दिन उसी विज्ञापन के तहत अन्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई थी.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने 2018 में दस्तावेज सत्यापन और काउंसलिंग पूरी कर ली थी, लेकिन गैर-अनुसूचित जिलों में नियुक्तियों पर कोई रोक नहीं होने के बावजूद उनका परिणाम दिसंबर 2020 में प्रकाशित किया गया और नियुक्ति 2021 में दी गई. दूसरी ओर, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि वरिष्ठता नियुक्ति ग्रहण करने की तिथि से ही मिल सकती है और जिला संवर्ग होने के कारण पहले की तिथि से लाभ नहीं दिया जा सकता.
हाईकोर्ट ने खारिज की दलील
हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. अदालत ने कहा कि सोनी कुमारी बनाम झारखंड राज्य मामले में पूर्णपीठ पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि गैर-अनुसूचित जिलों में नियुक्तियों पर कोई रोक नहीं थी. इसके बावजूद सरकार की कार्रवाई में हुई देरी के कारण इन शिक्षकों की नियुक्ति दो वर्ष से अधिक समय तक लंबित रही. इसमें शिक्षकों की कोई गलती नहीं थी.
सत्यजीत कुमार बनाम झारखंड राज्य मामले में क्या हुआ
अदालत ने यह भी माना कि बाद में सत्यजीत कुमार बनाम झारखंड राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संशोधित मेरिट सूची तैयार हुई, लेकिन इससे उन अभ्यर्थियों को सेवा लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता, जिनकी नियुक्ति केवल सरकारी विलंब के कारण देर से हुई.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिए निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इन शिक्षकों की नियुक्ति की काल्पनिक तिथि (Notional Date of Appointment) वर्ष 2019 में उसी जिले में हुई प्रारंभिक नियुक्तियों की तिथि मानी जाए. साथ ही उन्हें वरिष्ठता, वार्षिक वेतनवृद्धि (Increment), अपग्रेडेड वेतनमान तथा अन्य सभी परिणामी सेवा लाभ दिए जाएं. हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि उन्हें बकाया वेतन (Back Wages) नहीं मिलेगा. कोर्ट ने आदेश दिया कि इस निर्णय का अनुपालन 12 सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए. इसके साथ ही सभी संबंधित रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए उनका निस्तारण कर दिया गया.
