Lohardaga: उप विकास आयुक्त राज महेश्वरम की अध्यक्षता में मंगलवार को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक हुई, जिसमें मध्याह्न भोजन योजना, विद्यार्थियों की उपस्थिति, स्वास्थ्य जांच, तिथि भोजन व्यवस्था तथा विद्यालय से बाहर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए चलाए जाने वाले विशेष नामांकन अभियान सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत समीक्षा की गई. बैठक के दौरान मध्याह्न भोजन योजना की समीक्षा में यह तथ्य सामने आया कि जिले के कई विद्यालयों में विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति और मध्याह्न भोजन ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों की संख्या में अंतर पाया जा रहा है. इस पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए उप विकास आयुक्त ने प्रत्येक प्रखंड से ऐसे दो-दो मामलों को अगली बैठक में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, ताकि इन विसंगतियों के कारणों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
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मिड डे मील की गुणवत्ता की समीक्षा की गई
बैठक में अनामृता फाउंडेशन द्वारा इंटीग्रेटेड किचेन के माध्यम से विद्यालयों में उपलब्ध कराए जा रहे मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता की भी समीक्षा की गई. उप विकास आयुक्त ने खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी को नियमित रूप से भोजन की गुणवत्ता की जांच करने तथा निर्धारित मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी. राज महेश्वरम ने विद्यालयों में बच्चों की नियमित एवं शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता तभी बेहतर हो सकती है जब छात्र-छात्राएं नियमित रूप से विद्यालय आएं. उन्होंने निर्देश दिया कि जिन विद्यालयों में बीते माह की तुलना में गत माह की उपस्थिति के आंकड़ों में असामान्य गिरावट या अंतर पाया गया है, उन विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज) जारी किया जाए और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाए.

बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने का निर्देश
बैठक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत छात्र-छात्राओं की नियमित स्वास्थ्य जांच की प्रगति की भी समीक्षा की गई. उप विकास आयुक्त ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि सभी विद्यालयों में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित की जाए. साथ ही स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान हीमोग्लोबिन जांच एवं ब्लड ग्रुप की पहचान को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर उनका उपचार किया जा सके. इस अवसर पर तिथि भोजन कार्यक्रम तथा एसएमएस आधारित मध्याह्न भोजन मॉनिटरिंग व्यवस्था की भी समीक्षा की गई. अधिकारियों ने इस प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक सुझाव प्रस्तुत किए, जिस पर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक में 7 जुलाई से 7 सितंबर 2026 तक चलाए जाने वाले विशेष नामांकन अभियान “स्पेशल एनरोलमेंट, ट्रैकिंग एंड एंगेजमेंट ऑफ आउट ऑफ स्कूल चिल्ड्रेन” को लेकर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया. उप विकास आयुक्त ने जिला शिक्षा अधीक्षक को अभियान के सफल संचालन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने तथा आवश्यक प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि विद्यालय से बाहर रह रहे बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. इसके लिए खनन विभाग, बाल संरक्षण इकाई, पुलिस विभाग, समाज कल्याण विभाग, श्रम विभाग तथा पंचायत प्रतिनिधियों, विशेष रूप से मुखियाओं का सहयोग लिया जाएगा, ताकि जिले का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे. बैठक में जिला शिक्षा अधीक्षक अभिजीत कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी जया सांखी मुर्मू, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईओ) सहित शिक्षा एवं संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे.
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