हजारीबाग: कस्तूरबा की बेटियों को मिला सुरक्षा, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत जागरूकता सत्र और स्वास्थ्य जांच शिविर

Hazaribagh: महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के तत्वावधान में मंगलवार को कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, इचाक में ‘बेटी बचाओ-बेटी...

Hazaribagh: Kasturba's daughters get protection, awareness sessions and health check-up camps under the 'Beti Bachao-Beti Padhao' campaign

Hazaribagh: महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के तत्वावधान में मंगलवार को कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, इचाक में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के अंतर्गत जागरूकता सत्र एवं स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरियों को स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाकर आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाना था.

साइबर सुरक्षा से लेकर बाल अधिकारों तक दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

जागरूकता सत्र के दौरान छात्राओं को साइबर सुरक्षा, इंटरनेट के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग, जेंडर समानता, चाइल्ड हेल्पलाइन, बाल संरक्षण, बाल विवाह निषेध तथा सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना सहित कई महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत जानकारी दी गई. विशेषज्ञों ने छात्राओं को बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग कैसे करें, साइबर अपराध या ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में क्या सावधानियां बरतें और जरूरत पड़ने पर सहायता कैसे प्राप्त करें.

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स्वास्थ्य जांच शिविर में बीएमआई और हीमोग्लोबिन की हुई जांच

कार्यक्रम के दौरान आयोजित स्वास्थ्य जांच शिविर में छात्राओं का बीएमआई मापा गया तथा हीमोग्लोबिन जांच की गई. जिन छात्राओं में हीमोग्लोबिन का स्तर कम पाया गया, उन्हें आयरन एवं फोलिक एसिड की गोलियां उपलब्ध कराई गईं.

पोषण और स्वच्छता पर भी दिया गया विशेष जोर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने छात्राओं को संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने, नियमित स्वास्थ्य जांच कराने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने बताया कि बेहतर स्वास्थ्य ही बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है.

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कार्यक्रम में उत्साहित दिखी छात्रा

कार्यक्रम में विद्यालय की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. उन्होंने विशेषज्ञों से स्वास्थ्य, सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा का समाधान किया. विभाग की ओर से कहा गया कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य किशोरियों को जागरूक, आत्मविश्वासी और सशक्त बनाकर समाज में उनकी भागीदारी को और मजबूत करना है.

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