Hazaribagh: हजारीबाग बगोदर उप डाकघर के अधीन संचालित चौथा ग्रामीण डाकघर में स्पीड पोस्ट वितरण में कथित लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है. भारतीय जीवन बीमा निगम का पॉलिसी बॉन्ड, जिसे स्पीड पोस्ट के माध्यम से कुछ दिनों के भीतर लाभुक तक पहुंच जाना चाहिए था, वह करीब दो महीने तक डाकघर में ही पड़ा रहा. हैरत की बात यह रही कि ऑनलाइन ट्रैकिंग में 23 मई 2026 को ही उसे ‘डिलीवर’ दिखा दिया गया, जबकि वास्तविक रूप से लाभुकों को पॉलिसी बॉन्ड 24 जुलाई की शाम लगातार दबाव के बाद सौंपा गया. मामला हेठली बोदरा निवासी मिथिलेश यादव और रेणु देवी से जुड़ा है.
लाभुक दस्तावेज के लिए लगातार डाकघर का चक्कर लगाते रहे
दोनों के नाम एलआईसी का पॉलिसी बॉन्ड स्पीड पोस्ट से भेजा गया था. डाक विभाग की ट्रैकिंग के अनुसार 11 मई को कोलकाता में बुकिंग, 12 मई को डिस्पैच, 13 मई को रांची आरएमएस, 20 मई को धनबाद एनएसएच, 21 मई को बगोदर उप डाकघर तथा 22 मई को चौथा ग्रामीण डाकघर में डाक पहुंच गई. इसके अगले दिन 23 मई को ट्रैकिंग में इसे ‘डिलीवर’ दर्ज कर दिया गया. हालांकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग निकली. लाभुकों को न तो मई में और न ही जून के दौरान पॉलिसी बॉन्ड मिला. दोनों महत्वपूर्ण दस्तावेज करीब दो महीने तक चौथा ग्रामीण डाकघर में ही पड़े रहे. इस दौरान लाभुक आवश्यक दस्तावेज के लिए लगातार डाकघर का चक्कर लगाते रहे.
ट्रैकिंग दिखाने पर खुली लापरवाही
जब लाभुकों ने ऑनलाइन ट्रैकिंग दिखाते हुए चौथा ग्रामीण डाकघर में डाक वितरण का कार्य देख रहे अजीत कुमार सिन्हा से संपर्क किया, तो पहले उन्होंने संबंधित नामों से कोई स्पीड पोस्ट आने से इनकार कर दिया. लेकिन ट्रैकिंग का विवरण व्हाट्सएप पर भेजे जाने के कुछ ही समय बाद उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों पॉलिसी बॉन्ड डाकघर में ही रखे हुए हैं. उन्होंने पोस्टमास्टर के निधन और डाक वितरण व्यवस्था प्रभावित होने का हवाला दिया. इसके बाद लगातार दबाव बनने पर 24 जुलाई की शाम करीब पांच बजे दोनों लाभुकों के घर जाकर एलआईसी का पॉलिसी बॉन्ड सौंपा गया. लाभुक रेणु देवी का कहना है कि बॉन्ड सौंपते समय अजीत कुमार सिन्हा ने स्वयं कहा कि “पॉलिसी बॉन्ड को लेकर मुझ पर काफी दबाव बनाया गया, इसलिए इसे देने आया हूं.”
उप डाकपाल ने जांच का दिया आश्वासन
बगोदर उप डाकघर के उप डाकपाल सुनील कुमार ने बताया कि चौथा ग्रामीण डाकघर में पदस्थापित पोस्टमैन अस्मिता हांसदा लंबे समय से बीमारी के कारण अवकाश पर हैं. उनकी अनुपस्थिति में अजीत कुमार सिन्हा डाक वितरण का कार्य देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि ट्रैकिंग में मई माह में डिलीवरी दर्ज है और वास्तविक वितरण जुलाई में हुआ है, तो यह गंभीर मामला है. पूरे प्रकरण की जांच कर संबंधित व्यक्ति से स्पष्टीकरण लिया जाएगा तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी स्पीड पोस्ट और रजिस्ट्री डाक समय पर लाभुकों तक नहीं पहुंचने तथा ट्रैकिंग में पहले ही ‘डिलीवर’ दिखाने की शिकायतें सामने आती रही हैं. शिकायतों के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं होने से लोगों का भरोसा डाक विभाग की सेवाओं पर कमजोर पड़ता जा रहा है. स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई, डाक वितरण प्रणाली को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्पीड पोस्ट जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि प्रीमियम सेवा मानी जाने वाली स्पीड पोस्ट की यह स्थिति है, तो सामान्य डाक सेवा की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है.
