Gumla: राज्य में सरकारें गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा करती रही हैं, लेकिन गुमला जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है. आदिवासी बहुल गुमला में सदर अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिल रहा इलाज
गुमला सदर अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है. कई बार लोग इलाज की उम्मीद छोड़कर वापस लौट जाते हैं. स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कई बार इस समस्या को लेकर आवाज उठाई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है.
सिविल सर्जन ने भी सरकार को लिखा पत्र
सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने भी डॉक्टरों की कमी को लेकर कई बार सरकार को पत्र लिखा है. उनका कहना है कि चिकित्सकों की कमी के कारण अस्पताल संचालन में काफी दिक्कतें आ रही हैं.
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स्वास्थ्य मंत्री के दौरे पर भी उठे सवाल
स्थानीय नेताओं का कहना है कि गुमला जैसे आदिवासी बहुल जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था का जायजा लेने के लिए अब तक बड़े स्तर पर पहल नहीं हुई है, इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है.
गरीब मरीजों की बढ़ती परेशानी
झारखंड रसोईया संघ की पदाधिकारी देवकी देवी ने सदर अस्पताल की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी के कारण गंभीर मरीजों की जान पर भी खतरा बना रहता है. सदर अस्पताल की स्थिति अब भी जस की तस बनी हुई है, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक जिले की गरीब जनता बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए इंतजार करती रहेगी.
