‘शिक्षा का मतलब सिर्फ नौकरी नहीं’, गुरु पूर्णिमा पर राज्यपाल संतोष गंगवार ने दिया बड़ा संदेश

Ranchi: गुरु पूर्णिमा के अवसर पर धुर्वा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आयोजित समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार...

Governor Santosh Gangwar
राज्यपाल संतोष गंगवार

Ranchi: गुरु पूर्णिमा के अवसर पर धुर्वा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आयोजित समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की. इस दौरान उन्होंने विद्यालय की वार्षिक पत्रिका अरुणोदय का लोकार्पण करने के साथ-साथ उत्कृष्ट शिक्षण कार्य के लिए आचार्य सम्मान समारोह में भी हिस्सा लिया. समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने भारतीय शिक्षा प्रणाली, प्राचीन मूल्यों और आधुनिक तकनीकी समन्वय पर अपना दृष्टिकोण साझा किया.

भारतीय संस्कृति में गुरु की सर्वोच्च भूमिका

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोपरि है. गुरु केवल किताबी ज्ञान का संचार नहीं करते, बल्कि छात्र के व्यक्तित्व को गढ़कर उसे जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं. सरस्वती शिशु विद्या मंदिर जैसे शिक्षण संस्थान केवल शिक्षा का केंद्र नहीं हैं, बल्कि यह संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की जीवंत प्रयोगशाला हैं.

शिक्षा का अर्थ केवल नौकरी पाना नहीं

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का दायरा केवल रोजगार तक सीमित नहीं होना चाहिए. ज्ञान का वास्तविक मूल्य तभी सार्थक होता है, जब उसके साथ नैतिकता, विनम्रता, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की भावना जुड़ी हो. उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिक तैयार करना है, जो समाज और देश के समग्र विकास में सकारात्मक योगदान दे सके.

आधुनिकता और परंपरा का अनूठा संगम है नई शिक्षा नीति

राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह नीति शिक्षा जगत में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई है. इसके माध्यम से शिक्षा को समग्र, कौशल-आधारित और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ा जा रहा है. उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की, कि धुर्वा स्थित यह विद्यालय बच्चों को आधुनिक विज्ञान, कंप्यूटर तकनीक, खेलकूद और नवाचार से जोड़ने के साथ-साथ योग, संस्कृत, संगीत और नैतिक मूल्यों के संस्कारों से भी पोषित कर रहा है. ऐसी समन्वित और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली ही एक सशक्त और आत्मनिर्भर ‘विकसित भारत’ के निर्माण की असली नींव बनेगी. उन्होंने कहा कि परिश्रम, ईमानदारी और आत्मविश्वास के बल पर ही युवा देश के भविष्य को एक नई दिशा दे सकते हैं.

राष्ट्र निर्माताओं के रूप में शिक्षकों की बड़ी जिम्मेदारी

राज्यपाल ने शिक्षकों के योगदान की सराहना की. उन्होंने कहा कि शिक्षकों के कंधों पर केवल छात्रों का आज का दिन नहीं, बल्कि पूरे देश का भविष्य टिका हुआ है. उन्होंने विश्वास जताया कि आचार्यगण अपने ज्ञान, समर्पण और आदर्श आचरण से युवा पीढ़ी को सही दिशा दिखाते रहेंगे और राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में अपनी अहम भूमिका निभाते रहेंगे.

विद्यार्थियों के लिए सफलता के मूलमंत्र

• बड़े सपने देखें: अपने लक्ष्यों को उच्च रखें और उन्हें पाने के लिए निरंतर प्रयास करें.
• अनुशासन अपनाएं: जीवन की हर चुनौती से पार पाने के लिए अनुशासन को अपनी ढाल बनाएं.
• निरंतर सीखते रहें: सीखने की प्रवृत्ति ही व्यक्ति को जीवन में हमेशा आगे रखती है.
• बड़ों का सम्मान: माता-पिता और गुरुजनों का आदर करना ही वास्तविक सफलता की कुंजी है.

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