350 करोड़ का हिसाब नहीं दे पाई निर्माण कंपनी, 50 करोड़ हवाला कनेक्शन का खुलासा

तीन राज्यों में 4 दिन चला सर्च एंड सर्वे ऑपरेशन, 200 अधिकारियों की टीम ने खंगाले दस्तावेज, फर्जी बिलिंग का बड़ा नेटवर्क...

Construction company fails to account for Rs 350 crore, hawala connection worth Rs 50 crore exposed
  • तीन राज्यों में 4 दिन चला सर्च एंड सर्वे ऑपरेशन, 200 अधिकारियों की टीम ने खंगाले दस्तावेज, फर्जी बिलिंग का बड़ा नेटवर्क सामने

Ranchi: निर्माण क्षेत्र की बड़ी कंपनी मेसर्स रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी 10 सहयोगी कंपनियों पर आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा द्वारा चलाया गया चार दिवसीय सर्च एंड सर्वे ऑपरेशन रविवार को पूरा हो गया. इस कार्रवाई में विभाग के हाथ बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य लगे हैं. जांच में करीब 350 करोड़ रुपए के लेन-देन का स्पष्ट हिसाब कंपनी प्रबंधन नहीं दे सका है, जबकि 50 करोड़ रुपए के हवाला ट्रांजेक्शन के भी ठोस प्रमाण मिले हैं. आयकर विभाग को मिले डिजिटल साक्ष्यों, खासकर व्हाट्सएप चैट और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से यह संकेत मिला है कि हवाला के जरिए बड़े पैमाने पर रकम का आदान-प्रदान किया गया. साथ ही फर्जी बिलिंग के माध्यम से टैक्स चोरी का संगठित नेटवर्क भी सामने आया है. जब्त दस्तावेजों और डिजिटल डाटा की गहन जांच के लिए दिल्ली और कोलकाता से फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम को शामिल किया गया था.

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रांची से गुरुग्राम तक खंगाले गए ठिकाने

सर्च एंड सर्वे की यह कार्रवाई झारखंड, बिहार और हरियाणा में एक साथ चलाई गई. रांची के कचहरी रोड स्थित पंचवटी प्लाजा (फ्लैट नंबर 702), बिहार के बेगूसराय स्थित कृष्णा नगर कार्यालय और हरियाणा के गुरुग्राम सेक्टर-54 स्थित सनसिटी शॉपिंग आर्केड समेत कई ठिकानों पर जांच की गई. इस दौरान 200 से अधिक आयकर अधिकारी और सुरक्षा बल के जवान मौजूद रहे. जांच के दायरे में रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन के अलावा उसकी सहयोगी कंपनियां जैसे आयुष श्रेयस प्रॉपर्टी प्राइवेट लिमिटेड, आरकेएससीपीएल इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और आरकेएससीपीएल प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल रहीं. ये कंपनियां राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं, पुल-पुलिया, स्टेडियम, आवासीय निर्माण और खनन क्षेत्र से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स में सक्रिय हैं. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनी ने फर्जी कंपनियों के जरिए बिल तैयार कर टैक्स देनदारी कम दिखाई. कई संदिग्ध कंपनियों के दस्तावेज और लेन-देन की कड़ियां जुड़ने के बाद आयकर विभाग ने पूरे नेटवर्क को चिन्हित करना शुरू कर दिया है.

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