दिल्ली: निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. करीब एक साल से अधिक समय से जेल में बंद विनय चौबे को शीर्ष अदालत ने नियमित जमानत दे दी है. हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने पर उनकी बेल रद्द की जा सकती है.

छह पन्नों के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने रखी शर्तें
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने विनय चौबे की जमानत याचिका पर सुनवाई की थी. सुनवाई के बाद गुरुवार को आदेश की कॉपी जारी की गई. छह पन्नों के आदेश में अदालत ने कहा कि विनय चौबे को ट्रायल कोर्ट यानी ACB कोर्ट द्वारा तय सभी शर्तों और नियमों का पालन करना होगा. इसके अलावा उन्हें हर सुनवाई की तारीख पर अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा, जब तक कि ट्रायल कोर्ट उन्हें विशेष छूट नहीं देता.

शर्त टूटी तो ACB कर सकेगी बेल रद्द करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगर जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो अभियोजन पक्ष यानी ACB को जमानत रद्द कराने के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता होगी.

चार्जशीट दाखिल होने और सह-आरोपी को बेल मिलने का दिया हवाला
अदालत ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है. इसके अलावा इस केस में एक सह-आरोपी को भी अदालत से जमानत मिल चुकी है. इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए समानता के आधार पर विनय चौबे को भी नियमित जमानत का लाभ दिया गया.
हजारीबाग लैंड स्कैम मामले में मिली राहत
विनय चौबे को जिस मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है, वह हजारीबाग जिले से जुड़े कथित लैंड स्कैम का मामला है. इस मामले में ACB ने कांड संख्या 11/2025 दर्ज किया है. मामले में विनय चौबे के करीबी विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन अंचल अधिकारी शैलेश कुमार और ब्रोकर विजय सिंह समेत 73 लोगों को आरोपी बनाया गया है.
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