Koderma: 10 अगस्त को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आयोजित देशव्यापी ‘जेल भरो आंदोलन’ के समर्थन में झारखंड राज्य किसान सभा,अखिल भारतीय किसान सभा, अखिल भारतीय किसान महासभा, सीटू, एक्टू और एटक के संयुक्त बैनर तले डॉक्टर उर्मिला चौधरी मोड़ से एक विशाल जुलूस निकाला गया, जो कोडरमा बाजार होते हुए समाहरणालय पर पहुंचकर प्रदर्शन में तब्दील हो और प्रदर्शनकारी एसपी कार्यालय के मुख्य गेट को घंटो जाम कर धरने पर बैठ गए. जहां भारत अमेरिका व्यापार समझौता रद्द करो, लेबर कोड वापस लो, पेपर लिक पर रोक लगाओ, मोदी सरकार मुर्दाबाद आदि नारे लगाए जा रहे थे.
जनता के बीच व्यापक रोष
जहां झारखंड राज्य किसान सभा के राज्य अध्यक्ष असीम सरकार की अध्यक्षता में हुई सभा को अखिल भारतीय किसान सभा के नेता और जिला परिषद सदस्य महादेव राम, सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान, एआईकेएस के जिला संयोजक अर्जुन यादव, सीटू के जिलाध्यक्ष प्रेम प्रकाश, आंगनबाड़ी यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष मीरा देवी, एटक नेत्री सोनी देवी, एक्टू के जिला सचिव विजय पासवान, अध्यक्ष राजेन्द्र यादव, किसान महासभा के जिलाध्यक्ष अशोक यादव, झामकिस के राजेन्द्र मेहता, झारखंड राज्य किसान सभा के संयोजक फेकुलाल विद्यार्थी, सुरेन्द्र राम आदि ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली, मजदूरों के अधिकारों पर हमले और सार्वजनिक क्षेत्र एवं प्राकृतिक संसाधनों के बढ़ते निजीकरण के साथ-साथ पेपर लीक जैसी संस्थागत समस्याओं के खिलाफ जनता के बीच व्यापक रोष है. चाहे 13 महीने का किसान आंदोलन हो, मजदूर संगठनों द्वारा लगातार की गई हड़ताल कार्रवाई एवं रोष प्रदर्शन हो, इस वर्ष उत्तर भारत के औद्योगिक इलाकों में मजदूरों के बीच स्फूर्त आंदोलन हो या पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों का सड़क पर आना – ये सभी जनअसंतोष और लोकतांत्रिक संघर्ष की बढ़ती अभिव्यक्तियां हैं.
लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा
वक्ताओं ने छात्रों के झारखण्ड विधानसभा मार्च के दौरान छात्र नेत्री नेहा वोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना की भी कड़ी निंदा की गई. वक्ताओं ने कहा कि असहमति और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाने वाले छात्र आंदोलन को नफरत और हिंसा के जरिए दबाने की कोशिश लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है. शिक्षा को बचाने के लिए देशभर में तेजी से फैल रहे छात्र आंदोलन के खिलाफ ऐसी घटनाएं बौखलाहट को दर्शाती हैं. वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों पर बढ़ते हमलों के बीच मजदूर-किसान, छात्र और अन्य मेहनतकश एवं जनपक्षीय ताकतों की एकजुटता के आधार पर जनपक्षीय नीतियों के लिए संघर्ष को मजबूत करना समय की आवश्यकता है. धन्यवाद ज्ञापन भागीरथ सिहं ने किया.
ये शामिल रहें
संयुक्त आंदोलन की प्रमुख मांगों में अमेरिका – भारत व्यापार समझौता रद्द करने, चारों लेबर कोड के मजदूर विरोधी प्रावधानों को रद्द करना, सभी के लिए खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आवास, सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा एवं पेंशन, सभी कृषि उपज की वैधानिक MSP पर खरीद की गारंटी, किसानों की सम्पूर्ण कर्जमाफी, सम्मानजनक रोजगार एवं न्यूनतम मजदूरी की कानूनी गारंटी, ग्रामीण एवं शहरी रोजगार गारंटी, स्कीम वर्करों तथा अनुबंधित एवं अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण, बेलगाम निजीकरण और स्थायी नौकरियों के ठेकाकरण पर रोक लगाने की मांग आदि प्रमुख मुद्दों आदि शामिल हैं. कार्यक्रम में ग्यासुद्दीन अंसारी, भीखारी तुरी, नागेश्वर दास, शम्भु पासवान, बसंती देवी, सुरेन्द्र पांडेय, शुभ्रोज्योति सरकार, अनंत कुमार मेहता, विरेन्द्र यादव, सुखदेव पांडेय, विनोद यादव, रंजन रजक, किशोर चौधरी, रामकृष्ण शर्मा, बसमतीया देवी, उमा देवी, राजेन्द्र रजक, युगेश कुमार, रमेश यादव, पुरूषोत्तम रजक, मुन्ना यादव, असगर अंसारी, राजेन्द्र यादव, बहादुर यादव, सलीम अंसारी, राजकिशोर यादव, बिनोद पांडेय, शिवचन्द्र यादव, सरोज मेहता, सुभाष मेहता, सरयु यादव, राजेन्द्र साव, अर्जुन यादव सहित सैकड़ों की संख्या में किसान मजदूर संगठनों के लोग शामिल थे.
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