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लाठी के दम पर छात्रों की आवाज दबाना चाहती है सरकारः आदित्य साहू

Ranchi: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर कहा कि हेमंत सरकार लाठी के दम पर छात्रों की...

aditya sahu

Ranchi: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर कहा कि हेमंत सरकार लाठी के दम पर छात्रों की आवाज दबाना चाहती है. यह बर्बरतापूर्ण कार्रवाई है. अपने हक और अधिकार की मांग कर रहे निहत्थे छात्रों पर पुलिस का लाठीचार्ज बेहद शर्मनाक और लोकतंत्र के लिए काला अध्याय है. पहले बारिश में टेंट नहीं लगाने दिया, फिर वाटर कैनन चलाया और अब छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं.

दोषियों पर कार्रवाई हो

उन्होंने कहा कि एक तरफ कांग्रेस दिल्ली में धरना प्रदर्शन करती है, प्रधानमंत्री आवास का घेराव करती है. वहीं दूसरी ओर झारखंड में अपनी सरकार के इस दमन पर कांग्रेस का मुंह पूरी तरह बंद है. कांग्रेस और राहुल गांधी में अगर दम है तो वह छात्रों की जो सीबीआई जांच की मांग है, उसे हेमंत सोरेन पर दबाव डालकर पूरा करवाएं या फिर अविलंब राज्य सरकार से अपना समर्थन वापस लें. छात्रों की मांग स्पष्ट है, सभी परीक्षाओं की CBI जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और उन्हें जेल भेजा जाए. अगर कांग्रेस में नैतिकता बची है, तो JMM सरकार से समर्थन वापस ले. छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं होगा. सीबीआई जांच की मांग पूरी नहीं होने पर भाजपा राज्य सरकार का जीना दूभर कर देगी.

नौकरियां खुलेआम बेची जा रही है

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समर्थन से झारखंड में पिछले 6 वर्षों से झामुमो के नेतृत्व में सरकार चल रही है. इस सरकार ने छात्रों, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का काम किया है. नौकरियां खुलेआम बेची जा रही है. JPSC, JSSC, CGL और उत्पाद सिपाही भर्ती तक—हर परीक्षा सवालों के घेरे में है. पेपर लीक, गड़बड़ी और बाहरी छात्रों को लेकर उठ रहे सवालों ने लाखों युवाओं के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है. लगातार ठगने और गुमराह करने की राजनीति कितने दिनों तक चलेगी. छात्रों के सब्र का बांध पूरी तरह टूट चुका है. भर्ती परीक्षाओं के घोटाले में मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री,अधिकारी सभी की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष भूमिका प्रतीत हो रही है, इसलिए सरकार सीबीआई जांच से पीछे भाग रही है. झारखंड सरकार को हर हाल में सीबीआई जांच करानी ही होगी. अगर मुख्यमंत्री सीबीआई जांच की अनुशंसा नहीं करते हैं तो उन्हें अपना इस्तीफा तत्काल सौंप देनी चाहिए.

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