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जामुन से रोजगार का नया मॉडल, जामताड़ा की दीदियां बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

Jamtara: ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में जामताड़ा में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है. झारखंड स्टेट...

Jamtara: ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में जामताड़ा में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के मार्गदर्शन में सखी मंडल की महिलाओं ने इस वर्ष जामुन की बंपर पैदावार को आजीविका का मजबूत माध्यम बनाते हुए जामुन से सिरका (ब्लैक प्लम विनेगर) बनाने का कार्य शुरू किया है. फतेहपुर स्थित आजीविका सेवा केंद्र (ASK) में महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से तैयार किया जा रहा यह उत्पाद न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक नया अध्याय लिखेगा.

बर्बाद होने वाले जामुन को बनाया कमाई का जरिया

जामताड़ा जिले के जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में हर वर्ष बड़ी मात्रा में जामुन का उत्पादन होता है. बाजार और प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव में इसका बड़ा हिस्सा या तो बर्बाद हो जाता था या फिर बेहद कम कीमत पर बिक जाता था. इस वर्ष JSLPS ने इस समस्या को अवसर में बदलने की रणनीति बनाई.

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जिले के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों से उच्च गुणवत्ता वाले जामुन का संग्रहण किया. इसके बाद इन जामुनों को फतेहपुर स्थित आजीविका सेवा केंद्र लाया गया, जहां वैज्ञानिक एवं पारंपरिक तकनीकों के समन्वय से जामुन सिरका तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई.

स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद की बढ़ रही मांग

विशेषज्ञों के अनुसार, जामुन का सिरका स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है. मधुमेह रोगियों के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है. इसके अलावा यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, पेट संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने तथा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है. प्राकृतिक और शुद्ध उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए जामताड़ा में तैयार हो रहे इस सिरके के लिए बाजार में बेहतर संभावनाएं दिखाई दे रही हैं.

महिला सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बना यह अभियान

जामुन संग्रहण, छंटाई, प्रसंस्करण, सिरका निर्माण और पैकेजिंग जैसे कार्यों में दर्जनों ग्रामीण महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं. इससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने के साथ-साथ नियमित आय का नया स्रोत भी प्राप्त हुआ है.

सखी मंडल की महिलाओं का कहना है कि पहले जामुन केवल मौसमी फल के रूप में उपयोग किया जाता था, लेकिन अब इसे मूल्य संवर्धित उत्पाद में बदलकर बेहतर आमदनी प्राप्त की जा रही है. महिलाओं का लक्ष्य भविष्य में जामुन सिरका को एक पहचान प्राप्त स्थानीय ब्रांड के रूप में स्थापित करना है.

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा

ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार के अंतर्गत JSLPS द्वारा जिले में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. ‘सहजन डाली लगाओ’ और ‘हर घर सुरक्षा’ जैसे सफल अभियानों के बाद जामुन सिरका निर्माण की यह पहल भी ग्रामीण विकास और महिला उद्यमिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है.

यह पहल ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करते हुए स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने का कार्य कर रही है. साथ ही यह ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे स्तर के खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की संभावनाओं को भी बढ़ावा दे रही है.

बदलाव की मिसाल बन रही हैं जामताड़ा की दीदियां

फतेहपुर ASK केंद्र में महिलाएं पूरी लगन, स्वच्छता और तकनीकी मानकों का पालन करते हुए जामुन सिरका तैयार कर रही हैं. यह पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास और उद्यमशीलता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है.

जामताड़ा जिला प्रशासन और JSLPS की यह संयुक्त पहल आने वाले समय में जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है और अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है.

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