Palamu : शहर में गहराते पेयजल संकट और दम तोड़ते जल स्रोतों को लेकर वरिष्ठ नागरिक मंच ने परिषद भवन में एक प्रेस वार्ता की. मंच ने प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचते हुए शहर के ऐतिहासिक तालाबों और कुओं के अविलंब संरक्षण और उनके पुनर्जीवन के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है. मंच का कहना है कि हर साल गर्मी में पैदा होने वाले भीषण जल संकट की मुख्य वजह इन जल स्रोतों पर अवैध कब्जा, भारी गंदगी और प्रशासनिक उपेक्षा है. प्रेस वार्ता में मंच के पदाधिकारियों ने शहर के प्रमुख तालाबों की बदहाली का सिलसिलेवार ब्योरा पेश किया. जिसमें –

नवाटोली तालाब : कभी पानी का बड़ा स्रोत रहा यह तालाब आज पूरी तरह कूड़ेदान में बदल चुका है. इसके वास्तविक क्षेत्रफल से छेड़छाड़ की गई है और जल निकासी के रास्ते बंद हो चुके हैं.
आबादगंज तालाब : कई हेक्टेयर में फैला यह तालाब अब अपने अस्तित्व की अंतिम लड़ाई लड़ रहा है. करीब 80 प्रतिशत मृतप्राय हो चुके इस तालाब की बदहाली से इलाके का जल संकट और गहरा गया है.
बस स्टैंड तालाब : तीन तालाबों की ऐतिहासिक और वैज्ञानिक प्रणाली पर आधारित यह धरोहर अब बर्बादी की कगार पर है. गंदे पानी को प्राकृतिक रूप से साफ करने वाला यह सिस्टम अतिक्रमण और मलबे के कारण पूरी तरह ठप हो चुका है.
हमीदगंज तालाब : चारों तरफ से कचरा फेंके जाने के कारण यह तालाब भी अपना 70 प्रतिशत अस्तित्व खो चुका है. इसके अलावा रोटरी स्कूल तालाब, शाहपुर तालाब और पनेरी बांध तालाब की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है.
मंच ने आग्रह किया कि तालाबों में लगातार कचरा डंप होने से न केवल सतही जल समाप्त हो रहा है, बल्कि जमीन के नीचे का पानी (भूगर्भ जल) भी दूषित हो रहा है. इस सच्चाई को उजागर करने के लिए संस्था ने ड्रोन कैमरे से इन सभी तालाबों की वीडियो शूटिंग कराई है. जिसकी पेन ड्राइव सबूत के तौर पर प्रशासन को सौंपी गई है. वरिष्ठ नागरिकों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ियां इस लापरवाही को कभी माफ नहीं करेंगी.
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