Ranchi: पेट्रोल- डीजल एवं ऊर्जा की आपूर्ति की स्थिति और बढ़ते ऊर्जा संकट को देखते हुए न्यायिक अकादमी, झारखंड ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. संस्थान ने अपनी सभी आगामी अकादमिक गतिविधियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अब ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने का फैसला किया है. यह जानकारी जूडिशियल एकेडमी के निदेशक अमीकर पवार ने दी.
प्रधानमंत्री की अपील का असर
विदित हो कि देश में मौजूदा ऊर्जा और ईंधन आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए, बीते 10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ऊर्जा बचत हेतु विशेष अपील की थी. इसी दिशा में कदम उठाते हुए अकादमी ने यह बदलाव किया है.इस संबंध में सभी जिला न्यायालयों को पत्र निर्गत कर दिया गया है, जिसकी प्रति अकादमी की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध करा दी गई है.

बचेगा ईंधन और समय
न्यायिक अकादमी के इस निर्णय से अब न्यायिक पदाधिकारियों और इससे जुड़े अन्य लोगों को प्रशिक्षण के लिए रांची स्थित अकादमी परिसर आने की आवश्यकता नहीं होगी. प्रशिक्षणार्थी अब अपने संबंधित जिलों से ही कार्यशालाओं में सम्मिलित हो सकेंगे.इस व्यवस्था से न केवल अधिकारियों के समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन संरक्षण की दिशा में भी यह एक बड़ा और प्रभावी कदम साबित होगा.
न्यायिक अकादमी, झारखंड नियमित रूप से न्यायिक पदाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों, अधिवक्ताओं और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों के लिए विभिन्न कानूनी विषयों पर प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन करती है. वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अकादमी प्रतिमाह औसतन 5 से 6 प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करती है. इन कार्यक्रमों के माध्यम से हर महीने लगभग 400 से 500 अधिकारियों और अधिवक्ताओं को प्रशिक्षित किया जाता है. अकादमी का यह डिजिटल बदलाव न केवल आधुनिक तकनीक के समन्वय को दर्शाता है, बल्कि विषम परिस्थितियों में कार्य निरंतरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता को भी सिद्ध करता है.
