JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा, अल्बर्ट एक्का चौक पर आर-पार का शंखनाद, अब अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने का ऐलान

Ranchi: JPSC और JSSC की परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ी , पेपर लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ अब अभ्यर्थी आर-पार...

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विरोध प्रदर्शन करते छात्र

Ranchi: JPSC और JSSC की परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ी , पेपर लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ अब अभ्यर्थी आर-पार के मूड में हैं. अल्बर्ट एक्का चौक पर विरोध प्रदर्शन के बाद छात्रों का एक हिस्सा वापस जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम लौट गया है, जहां आगे की रणनीति पर गंभीर मंथन किया गया. छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी सुध नहीं ली, तो वे स्टेडियम में ही आमरण अनशन और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने के लिए बाध्य होंगे. युवाओं ने साफ कर दिया है कि इस बार न्याय मिलने तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है, चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी हद तक क्यों न जाना पड़े.

संविधान यात्रा से गरमाया राजनीतिक पारा

दोपहर करीब तीन बजे हजारों की तादाद में छात्र जयपाल सिंह मुंडा फुटबॉल स्टेडियम से एकजुट होकर संविधान यात्रा के रूप में निकले. फिरायालाल चौक से होते हुए यह जनसैलाब अल्बर्ट एक्का चौक पर पहुंचा, जहां युवाओं ने सड़क पर बैठकर ही संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया और जमकर शक्ति प्रदर्शन किया. इस दौरान चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात रहा. लेकिन युवाओं के आक्रामक तेवर तल्ख रहे.

सेटिंग-गेटिंग नहीं चलतौ

छात्रों ने तंज कसते हुए बैनरों पर लिखा कि JPSC सीट का दाम बताओ, हम पैसा जुगाड़ कर रहे हैं. छात्रों का आरोप है कि महकमों में खुलेआम सेटिंग-गेटिंग का खेल चल रहा है और बीडीओ-सीओ की कुर्सियों की सौदेबाजी 1-1 करोड़ रुपये में की जा रही है. युवाओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति या एक परीक्षा की नहीं है, बल्कि यह उस हर उस छात्र के अस्तित्व की लड़ाई है जो ईमानदारी के बल पर मुकाम हासिल करना चाहता है.

छात्रों की 5 प्रमुख और अल्टीमेटम भरी मांगें

• CBI और ED जांच: JPSC  और JSSC की सभी संदेहास्पद परीक्षाओं की उच्चस्तरीय जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए.
• आयोगों का पूर्ण सफाया: भ्रष्टाचार में लिप्त JPSC और JSSC के वर्तमान अध्यक्ष तथा सभी सदस्यों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए.
• क्लीन एजेंसियों का चयन: भविष्य की परीक्षाओं के संचालन के लिए पूरी तरह कदाचार-मुक्त और पारदर्शी एजेंसियों का चयन हो.
• जिम्मेदारी तय हो: यदि इन मांगों पर त्वरित कार्रवाई नहीं होती है, तो मुख्यमंत्री या संबंधित मंत्री अपने पद से इस्तीफा सौंपें.
• नियमित कैलेंडर: सभी लंबित परीक्षाओं का नया और स्पष्ट नोटिफिकेशन जारी कर तय समय-सीमा के भीतर परीक्षा प्रक्रिया पूरी की जाए.

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