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विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली डॉ. मेघा रानी से मिले अनिल अमिताभ पन्ना, दी बधाई

रांची: विश्व रिकॉर्ड बनाकर दुनिया की सबसे तेज हिंदी हस्तलेखन करने वाली महिला बनीं लेखिका और समाजसेविका डॉ. मेघा रानी से सामाजिक...

विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली डॉ. मेघा रानी से मिले अनिल अमिताभ पन्ना
विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली डॉ. मेघा रानी से मिले अनिल अमिताभ पन्ना, दी बधाई

रांची: विश्व रिकॉर्ड बनाकर दुनिया की सबसे तेज हिंदी हस्तलेखन करने वाली महिला बनीं लेखिका और समाजसेविका डॉ. मेघा रानी से सामाजिक कार्यकर्ता एवं आदिवासी नेता अनिल अमिताभ पन्ना ने उनके आवास पर मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने पुष्पगुच्छ भेंट कर डॉ. मेघा रानी को बधाई दी और उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की. अनिल अमिताभ पन्ना ने कहा कि डॉ. मेघा रानी की यह सफलता सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे झारखंड, हिंदी भाषा और देश के लिए गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है और डॉ. मेघा रानी इसका बेहतरीन उदाहरण हैं.

हस्तलिखित पृष्ठ लिखकर विश्व रिकॉर्ड बनाया

डॉ. मेघा रानी ने 120 मिनट में 120 मौलिक हस्तलिखित पृष्ठ लिखकर विश्व रिकॉर्ड बनाया है. सभी आवश्यक जांच और सत्यापन के बाद उन्हें दुनिया की सबसे तेज हिंदी हस्तलेखन करने वाली महिला के रूप में आधिकारिक मान्यता मिली है. इस दौरान उन्होंने झारखंड के इतिहास, संस्कृति, परंपरा और विरासत पर लेखन किया, जिसे अब पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा. मुलाकात के दौरान डॉ. मेघा रानी ने कहा कि उन्होंने यह उपलब्धि अपनी मातृभाषा हिंदी,अपनी जन्मभूमि झारखंड और उन सभी लोगों को समर्पित की है, जिन्होंने हमेशा उनके लेखन पर विश्वास जताया. उन्होंने कहा कि यदि उनके काम से युवाओं और खासकर बेटियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है, तो यही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा.

साहित्य समाज और राष्ट्र निर्माण का मजबूत माध्यम

अनिल अमिताभ पन्ना ने कहा कि डॉ. मेघा रानी ने अपनी लेखनी से यह साबित किया है कि साहित्य समाज और राष्ट्र निर्माण का मजबूत माध्यम है. उनका यह विश्व रिकॉर्ड झारखंड की प्रतिभा को वैश्विक पहचान दिलाने वाला है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा. डॉ. मेघा रानी पिछले सात वर्षों से नारी विमर्श, सामाजिक विषयों और श्रीकृष्ण भक्ति पर लगातार लेखन कर रही हैं. उनकी प्रमुख पुस्तकों में “शाश्वत सृजन”, “श्रीकृष्ण लीला” और “अस्तित्व : एक नारी का” शामिल हैं. उनकी पुस्तक “श्रीकृष्ण लीला” को इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और OMG बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी स्थान मिल चुका है. साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2025 समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं.

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