• झारखंड के सभी जिलों में खुलेंगे आधुनिक ‘मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल’
• गूगल से करार बदल देगा तस्वीर
Ranchi: समय बदल चुका है, अब आबादी को बोझ नहीं बल्कि राज्य की सबसे बड़ी पूंजी और जनशक्ति बनाने का वक्त है. अगर हमारे युवाओं को सही स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार मिले तो यही जनसंख्या विकसित भारत की ताकत बनेगी. ये बातें झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर रांची में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में कहीं. उन्होंने कहा कि जनसंख्या नहीं, जनशक्ति बने झारखंड की पहचान. यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि हेमंत सोरेन सरकार की नीति है.
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युवा आबादी चुनौती नहीं, सुनहरा अवसर
डॉ. अंसारी ने कहा कि झारखंड एक युवा राज्य है, जहां की बड़ी आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है. सरकार इसे एक सुनहरे अवसर के रूप में देख रही है. युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार देकर झारखंड को देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा किया जाएगा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में हाल ही में गूगल के साथ हुआ समझौता राज्य में डिजिटल हेल्थ और युवाओं के लिए तकनीक आधारित रोजगार के नए रास्ते खोलेगा.
परिवार कल्याण का बदला नजरिया
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि परिवार कल्याण का मतलब सिर्फ जनसंख्या नियंत्रण नहीं, बल्कि हर परिवार को स्वस्थ, शिक्षित और समृद्ध बनाना है. महिलाओं का सशक्तिकरण, किशोर-किशोरियों में स्वास्थ्य जागरूकता और आधुनिक परिवार नियोजन सेवाओं की आसान उपलब्धता सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर भारत की आत्मा गांवों में बसती है, तो भारत का भविष्य यहां के युवाओं में है.
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स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव
कार्यक्रम में मौजूद स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ राज्य के हर गांव तक सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहा है. राज्य में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों की बहाली और ग्रामीण क्षेत्रों तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए युद्धस्तर पर काम चल रहा है. इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशनके मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा सहित वरिष्ठ पदाधिकारी, चिकित्सक और बड़ी संख्या में सहिया बहनें उपस्थित थीं.
स्वास्थ्य मंत्री ने क्या की घोषणा
• राज्य के सभी जिलों में अत्याधुनिक मातृ एवं शिशु अस्पताल विकसित किए जाएंगे.
• इन अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव, नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल और आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी.
• इसका सीधा उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भारी कमी लाना और महिलाओं को इलाज के लिए बाहर जाने से रोकना है.


