Ranchi: झारखंड सहायक आचार्य नियुक्ति मामले में नॉर्मलाइजेशन (Normalization) की प्रक्रिया को लेकर दायर याचिका पर मंगलवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता गिरिधर प्रसाद समेत अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नॉर्मलाइजेशन के तरीके पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के न्यायाधीश दीपक रोशन की एकल पीठ में हुई.

कोर्ट में उठे दो अहम सवाल:
सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने नॉर्मलाइजेशन की गड़बड़ियों को उजागर किया. याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से दो प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है.

समान सिटिंग में अलग-अलग अंक कैसे?:
एक ही सिटिंग में दो अलग-अलग अभ्यर्थियों के मूल अंक समान यानी 69 थे, लेकिन नॉर्मलाइजेशन के बाद एक अभ्यर्थी का स्कोर घट कर 17 हो गया, जबकि दूसरे का स्कोर 34 कर दिया गया. कोर्ट ने पूछा कि ऐसी समान परिस्थिति में दो अभ्यर्थियों के परिणाम में इतना भारी अंतर कैसे संभव है?

अलग-अलग अंक होने पर क्या स्कोर समान हो सकता है?:
अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या अलग-अलग रो मार्क्स पाने वाले परीक्षार्थियों का अंतिम नॉर्मलाइज्ड स्कोर एक जैसा हो सकता है?
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कोर्ट में पक्ष और अगली सुनवाई:
याचिकाकर्ता का पक्ष: प्रार्थी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार, अधिवक्ता चंचल जैन और अधिवक्ता अमृतांश वत्स समेत अन्य वकीलों ने अदालत के समक्ष अभ्यर्थियों का पक्ष रखा और नॉर्मलाइजेशन की विसंगतियों को सामने लाया. जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने पक्ष रखा.
हाई कोर्ट ने इन दोनों ही मुख्य बिंदुओं पर आयोग से विस्तृत और स्पष्ट जवाब मांगा है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने इसकी अगली सुनवाई की तारीख छह अगस्त तय की है.

