RANCHI: अखिल भारतीय कांग्रेस प्रवक्ता रितु चौधरी ने केंद्र की भाजपा सरकार आरोप लगाया है कि संसद में महिला आरक्षण नहीं, बल्कि देश को बांटने वाला परिसीमन बिल पेश किया गया था. कांग्रेस भवन में बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत महिलाओं को अधिकार देने की नहीं, बल्कि जनगणना और परिसीमन की शर्तें थोपकर उन्हें हक से वंचित रखने की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष ने महिलाओं के हित में आरक्षण बिल का साथ दिया था, लेकिन भाजपा इसे राजनीतिक लाभ के लिए हथियार बना रही है.
दावा किया कि सरकार ने 2023 के बिल को केवल इसलिए अधिसूचित नहीं किया क्योंकि उनकी नीयत में खोट है. रितु चौधरी ने मांग की कि यदि प्रधानमंत्री की नीयत साफ है, तो वह बिना किसी शर्त के 543 सीटों पर तत्काल महिला आरक्षण लागू करें, ताकि आगामी चुनावों में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित हो सके.
परिसीमन पर घेरा
रितू चौधरी ने कहा कि भाजपा जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर मनमाना परिसीमन कर उत्तर-पूर्व, गोवा और दक्षिण भारत के राज्यों को राजनीतिक रूप से हाशिये पर धकेलना चाहती है. ओबीसी महिलाओं को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण मिलना चाहिए, जिससे भाजपा उन्हें वंचित रखना चाहती है. 2017 में सोनिया गांधी और 2018 में राहुल गांधी ने (32 लाख हस्ताक्षरों के साथ) प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस बिल की मांग की थी. प्रेस वार्ता के दौरान मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, अध्यक्ष सतीश पॉल मुंजनी, सोनाल शांति और कमल ठाकुर मुख्य रूप से उपस्थित थे.
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