Bokaro: बेरमो SDM और अंचल अधिकारी (CO) कार्यालय द्वारा जारी किए गए बेदखली आदेश को लेकर गंभीर कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े हो गए हैं. मामला बोकारो थर्मल के जनता नगर निवासी संदीप कुमार पांडेय से जुड़ा है, जिनके नाम पर मकान और परिसर खाली करने का नोटिस जारी किया गया है, जबकि उनकी मृत्यु करीब नौ माह पहले ही हो चुकी है.
मृत व्यक्ति के नाम जारी हुआ नोटिस
प्रशासन की ओर से जारी आदेश में संदीप कुमार पांडेय को खाता संख्या-42 और प्लॉट संख्या-748 पर स्थित मकान एवं परिसर को सात दिनों के भीतर खाली करने का निर्देश दिया गया है. आदेश का पालन नहीं करने पर पुलिस बल के इस्तेमाल और दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. बताया गया कि अनुमंडल पदाधिकारी(SDM) , बेरमो (तेनुघाट) के न्यायालय में दायर बेदखली वाद संख्या-09/2025 में 22 मई 2026 को अंतिम आदेश पारित किया गया था. इसके बाद अंचल अधिकारी, बेरमो द्वारा 3 जुलाई 2026 को ज्ञापांक-735 के तहत नोटिस जारी किया गया.


संदीप पांडेय की नौ माह पहले हो चुकी थी मौत
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि संदीप कुमार पांडेय का निधन 13 अक्टूबर 2025 की रात को ही हो चुका था,इसके बावजूद उनके नाम पर बेदखली आदेश पारित किया गया और नोटिस जारी कर दिया गया. कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी मृत व्यक्ति के खिलाफ मुकदमे की कार्रवाई जारी रखना या उसके नाम पर अंतिम आदेश पारित करना कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है. ऐसे मामलों में मृत व्यक्ति के वैध उत्तराधिकारियों को पक्षकार बनाकर नियमानुसार नोटिस देना जरूरी होता है.
वारिसों को पक्षकार बनाए बिना कार्रवाई पर सवाल
बताया जा रहा है कि संदीप पांडेय की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारियों को मामले में शामिल करना आवश्यक था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, परिवार का आरोप है कि बिना सही कानूनी प्रक्रिया अपनाए बेदखली की कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया गया.
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जमीन और मकान पर भी उठे सवाल
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि खाता संख्या-42 और प्लॉट संख्या-748 पर स्थित विवादित मकान और जमीन संदीप पांडेय की माता सुशीला पांडेय के नाम दर्ज बताई जा रही है. सुशीला पांडेय कार्मेल स्कूल की सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं और वर्तमान में अपने दूसरे पुत्र शंभूनाथ पांडेय के साथ उसी मकान में रह रही हैं. परिवार का कहना है कि वास्तविक भू-स्वामी और वर्तमान निवासियों को नजरअंदाज कर मृत व्यक्ति के नाम पर कार्रवाई करना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है.
परिवार में बढ़ी चिंता, डीसी से न्याय की गुहार
इस आदेश के बाद पीड़ित परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल है, सुशीला पांडेय के पुत्र शंभूनाथ पांडेय शुक्रवार को आदेश के संबंध में बोकारो DC से मिलने पहुंचे थे, लेकिन DC के SIR कार्यक्रम में व्यस्त होने के कारण मुलाकात नहीं हो सकी.


