कैबिनेट का फैसलाः शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली-2026 को मिली मंजूरी

Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने...

Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (प्राथमिक शिक्षा निदेशालय) द्वारा झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) नियमावली-2026 को अधिसूचित कर दिया गया है. राज्य सरकार ने इस नई नियमावली को घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान करते हुए 26 मार्च 2026 से प्रभावी कर दिया है.

क्यों पड़ी नई नियमावली की जरूरत?

झारखंड में इससे पूर्व 2013 और 2016 में शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की गई थी. इसके बाद 2019 में नई नियमावली बनी, जिसमें 2022 और 2024 में संशोधन भी किए गए. हालांकि, झारखंड अधिविद्य परिषद द्वारा विज्ञापन संख्या-30/2024 के माध्यम से परीक्षा के आयोजन की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन अभ्यर्थियों द्वारा उठाई गई विभिन्न आपत्तियों और विसंगतियों के कारण विभागीय समिति ने पुराने विज्ञापन को रद्द कर नई नियमावली तैयार करने का निर्णय लिया. इसी समीक्षा के बाद ‘नियमावली-2026’ को अंतिम रूप दिया गया है.

नियमावली-2026 की प्रमुख विशेषताएं और योग्यताएं

नई नियमावली में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के मानकों का कड़ाई से पालन किया गया है.

• शैक्षणिक योग्यता (कक्षा 1-5 के लिए): न्यूनतम 50% अंकों के साथ +2/उच्चतर माध्यमिक उत्तीर्ण और प्रारंभिक शिक्षा शास्त्र में द्विवर्षीय डिप्लोमा अनिवार्य है. 2007 से पूर्व के प्रशिक्षण सत्रों के लिए न्यूनतम अंकों की सीमा 45% निर्धारित की गई है.

• आरक्षण में छूट: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), आदिम जनजाति (PVTG), पिछड़ा वर्ग और दिव्यांग कोटि के अभ्यर्थियों को निर्धारित न्यूनतम प्राप्तांक में 5% की छूट प्रदान की जाएगी.

• अपीयरिंग अभ्यर्थियों को मौका: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आलोक में, जो अभ्यर्थी प्रशिक्षण (B.Ed/D.El.Ed) की अंतिम परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, उन्हें भी परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी, बशर्ते परिणाम प्रकाशन तक वे अपना उत्तीर्णता प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर दें.

• आयु सीमा: परीक्षा में शामिल होने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है. अधिकतम आयु सीमा झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा तय नियमों के अनुसार होगी.

विशेष शिक्षकों और उर्दू शिक्षकों पर विशेष ध्यान

इस नियमावली में पहली बार “विशेष प्रशिक्षित सहायक आचार्य” (दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने वाले) और “सहायक आचार्य (उर्दू)” की परिभाषा और योग्यताओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. विशेष शिक्षकों के मामले में भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) के परामर्श को अंतिम माना जाएगा.

क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं की भूमिका

राज्य के विभिन्न जिलों के लिए क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की सूची भी जारी की गई है. रांची में कुड़ुख, मुंडारी, खड़िया के साथ-साथ नागपुरी, पंचपरगनिया और बंगला जैसी भाषाओं को मान्यता दी गई है, जबकि सिमडेगा, गुमला और सिंहभूम जैसे क्षेत्रों के लिए वहां की स्थानीय भाषाओं (जैसे हो, संताली, मुंडारी) को प्राथमिकता दी गई है.

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