E-20 पेट्रोल से कार में आई खराबी, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को नई गाड़ी देने का दिया आदेश

News Wave Desk: ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जिला उपभोक्ता विवाद...

image: AI Generated

News Wave Desk: ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक अहम फैसला सुनाया है. आयोग ने एक कार मालिक की शिकायत को सही ठहराते हुए वाहन निर्माता कंपनी को नई कार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. साथ ही मानसिक उत्पीड़न, मुकदमे के खर्च और अन्य क्षतिपूर्ति का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है.

ई-20 पेट्रोल भराने के बाद शुरू हुई परेशानी

मामला रायपुर निवासी डॉ. ओमप्रकाश डेढ़िया का है, जिन्होंने जनवरी 2024 में नई कार खरीदी थी. उनका आरोप है कि कार में ई-20 पेट्रोल डलवाने के बाद इंजन में लगातार तकनीकी खराबियां आने लगीं. वाहन का माइलेज घट गया और इंजन में मिसफायरिंग जैसी समस्याएं सामने आने लगीं. शिकायत के मुताबिक, कार को कई बार अधिकृत सर्विस सेंटर पर मरम्मत के लिए ले जाया गया, लेकिन हर बार अस्थायी सुधार के बाद वही दिक्कत दोबारा सामने आ गई. इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा.

कंपनी की दलील नहीं मानी आयोग ने

सुनवाई के दौरान वाहन निर्माता कंपनी और डीलर ने आयोग के सामने दावा किया कि संबंधित कार ई-20 ईंधन के अनुरूप तैयार की गई है और वाहन में आई खराबी सामान्य तकनीकी कारणों से हुई है. हालांकि, आयोग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया. आयोग ने कहा कि यदि कई बार सर्विसिंग और मरम्मत के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका, तो यह उपभोक्ता को गुणवत्तापूर्ण सेवा न मिलने का मामला है.

Read Also: सावन के सोमवार को सुहागिन महिलाएं क्यों रखती हैं व्रत? जानिए धार्मिक मान्यता और हरे रंग का महत्व

45 दिनों में नई कार देने का आदेश

उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को नई ई-20 फ्यूल सपोर्टेड कार उपलब्ध कराए और वाहन पर हुए खर्च की भरपाई भी करे. यदि निर्धारित समय में नई कार नहीं दी जाती है, तो कंपनी को वाहन की पूरी कीमत करीब 20.50 लाख रुपये लौटानी होगी. इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये का भुगतान भी करना होगा. आदेश का पालन समय पर नहीं करने की स्थिति में कंपनी को ब्याज भी देना पड़ेगा.

आयोग की अहम टिप्पणी

अपने आदेश में आयोग ने कहा कि वाहन मालिक के पास ई-20 पेट्रोल के उपयोग से बचने का कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं था. मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में उपलब्ध ईंधन का इस्तेमाल करना उपभोक्ता की मजबूरी है, इसलिए उससे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह ई-20 पेट्रोल का उपयोग न करे.

भविष्य के मामलों के लिए बन सकता है मिसाल

ई-20 पेट्रोल से जुड़ी शिकायत पर आया यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. माना जा रहा है कि भविष्य में ऐसे मामलों की सुनवाई के दौरान यह निर्णय एक अहम उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *