Ranchi : झारखंड के मत्स्य पालकों के लिए खुशखबरी है. राज्य सरकार ने मछली पालन को एक पारंपरिक व्यवसाय से बदलकर ‘मुनाफे की खेती’ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इसके लिए सरकार ने 72.82 करोड़ रुपये से अधिक की महत्वाकांक्षी ‘तालाब और जलाशय मत्स्य विकास एवं जीर्णोद्धार’ अंब्रेला योजना को मंजूरी दी है. इस योजना का एकमात्र उद्देश्य है, झारखंड को मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना और किसानों की आय में गुणात्मक उछाल लाना है. सरकार ने पंगेशियस, तिलापिया, अमृत कतला, देशी मांगुर और मरेल के उत्पादन पर जोर दिया है.
इन खास मछलियों से होगा मालामाल
सरकार का ध्यान अब केवल पुरानी प्रजातियों तक सीमित नहीं है. अब झारखंड के किसान उन प्रजातियों पर दांव लगाएंगे, जिनकी मांग बाजार में सबसे ज्यादा है और जो कम समय में बंपर मुनाफा देती है. बेहतर मुनाफे के लिए सरकार ‘मेजर कार्प’ और ‘ग्रास कार्प’ के साथ-साथ उच्च मांग वाली उन्नत प्रजातियों को बढ़ावा दे रही है. इनमें प्रमुख रूप से पंगेशियस , तिलापिया, अमृत कतला, देशी मांगुर और मरेल शामिल है.

क्यों खास है ये प्रजातियां
इन मछलियों का चयन वैज्ञानिक आधार पर किया गया है. पंगेशियस और तिलापिया जैसी मछलियां कम समय में तेजी से बढ़ती है. जिससे किसानों को बार-बार फसल लेने का अवसर मिलता है और बाजार में इनके दाम भी आकर्षित रहते है.
अब कम जगह में भी बंपर उत्पादन
• बायोफ्लॉक और आरएएस RAS : अगर आपके पास जमीन कम है, तो भी आप बायोफ्लॉक तकनीक और री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम का उपयोग कर सकते है. यह तकनीक बंद वातावरण में मछली पालन को बेहद आसान और अधिक उत्पादन देने वाला बनाती है.
• केज कल्चर : राज्य के बड़े जलाशयों और नदियों के फैलाव को अब ‘केज कल्चर’ के जरिए व्यावसायिक हब में बदला जा रहा है. यह तकनीक उन लोगों के लिए वरदान है जो बड़े जलस्त्रोतों के किनारे रहते है.
• मछली-सह-बत्तख पालन : यह समेकित मत्स्य पालन की एक अनूठी पद्धति है. इसमें किसान एक ही निवेश से मछली और बत्तख दोनों का उत्पादन कर सकते है. जिससे आय के दो स्रोत एक साथ खुल जाते है.
दाना से लेकर नाव तक सब कुछ अनुदान पर
मछली की तेजी से वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने फ्लोटिंग फीड (तैरने वाला दाना) पर सब्सिडी देने का निर्णय लिया है. इसके लिए रांची, रामगढ़, कोडरमा, बोकारो, धनबाद और सरायकेला में फीड फैक्ट्रियों को सुदृढ़ किया जा रहा है. इसके अलावा, मत्स्य बीज उत्पादकों के लिए पोर्टेबल हैचरिया और मछुआरों के लिए ग्रो-आउट नेट, गिल-नेट और मोटरचालित नावें भी रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएंगी.
महिला शक्ति और समावेशी विकास को प्राथमिकता
• महिला किसानों का सम्मान : योजना के चयन में महिला कृषकों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी बढ़ सके.
• दिव्यांगजन के लिए अवसर : राज्य की दिव्यांग नीति का पालन करते हुए इच्छुक दिव्यांगजनों को कुल योजना में तीन प्रतिशत का विशेष आरक्षण और लाभ सुनिश्चित किया गया है.
• पारदर्शिता की गारंटी : सरकारी मदद सही हाथों तक पहुंचे, इसके लिए ‘एस्क्रो अकाउंट’ की व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया गया है. इससे भ्रष्टाचार की संभावना खत्म होगी और हर लाभुक को पूरी ईमानदारी के साथ योजना का पैसा मिलेगा.
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