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नागपुरी फिल्म ‘सेरेंग’ पर केंद्रीय सरना समिति का विरोध, प्रतिबंध और कानूनी कार्रवाई की मांग

Ranchi: केंद्रीय सरना समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को होटल गंगा आश्रम में प्रेस वार्ता आयोजित कर नागपुरी फिल्म ‘सेरेंग’ और कुछ...

Central Sarna Samiti
केंद्रीय सरना समिति

Ranchi: केंद्रीय सरना समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को होटल गंगा आश्रम में प्रेस वार्ता आयोजित कर नागपुरी फिल्म ‘सेरेंग’ और कुछ नागपुरी एल्बमों में कथित अश्लीलता तथा आदिवासी समाज के आपत्तिजनक चित्रण का आरोप लगाया गया. समिति ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने और निर्माता, निर्देशक, कलाकारों एवं सहयोगियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की.

फिल्म पर लगाए गंभीर आरोप

केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने आरोप लगाया, कि फिल्म सेरेंग में एक मुस्लिम युवक और मुंडा युवती के बीच प्रेम प्रसंग तथा धर्म परिवर्तन के बाद विवाह का दृश्य दिखाया गया है, जिससे लव जिहाद और धर्म परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फिल्म में उरांव और मुंडा अनुसूचित जनजातियों के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां कर उनकी सामाजिक और सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है.

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को सौंपा गया था ज्ञापन

बबलू मुंडा ने बताया कि 23 मई 2026 को केंद्रीय सरना समिति के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा से नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर मुलाकात कर इस मामले में ज्ञापन सौंपा था. समिति के अनुसार, इसके बाद आयोग ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी), मुंबई तथा केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से सात दिनों के भीतर मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है.

आदिवासी संस्कृति से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं

बबलू मुंडा ने कहा कि यदि भविष्य में भी नागपुरी फिल्मों और एल्बमों में कथित फूहड़ता, अश्लीलता तथा आदिवासी पारंपरिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री प्रस्तुत की जाती है, तो ऐसे कलाकारों के खिलाफ सामाजिक स्तर पर कार्रवाई की जाएगी.

परंपराओं और संस्कृति का सम्मान करने की अपील

मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने कहा कि नागपुरी फिल्म और एल्बम बनाने वाले निर्माता-निर्देशक अनुसूचित जनजातियों के धर्म, संस्कृति, रीति-रिवाज, परंपराओं और सामाजिक सम्मान का ध्यान रखें. वहीं, प्रधान महासचिव अशोक मुंडा ने आरोप लगाया, कि फिल्म में आदिवासी समाज का चित्रण उनकी धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के विपरीत है, जिससे आदिवासी अस्मिता और गौरव को ठेस पहुंचती है. संदीप उरांव ने भी आरोप लगाया कि फिल्म में आदिवासी समाज की छवि को जानबूझकर कलंकित करने का प्रयास किया गया है, जिसका समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

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