Ranchi: चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा है कि पिछले आठ महीनों से चैंबर लगातार जमीनी स्तर पर काम कर रहा है, ताकि राज्य में व्यापार, उद्योग और रोजगार को नई गति दी जा सके. उन्होंने दावा किया कि इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब दिखने भी लगे हैं. कहा कि व्यापार किसी भी राज्य की “फाइनेंशियल बैकबोन” होता है, लेकिन झारखंड में अभी व्यापारियों और उद्योगों के लिए उतनी गंभीरता से नहीं सोचा जा रहा, जितनी आवश्यकता है. व्यापार बढ़ने से रोजगार पैदा होता है, लोगों की आय बढ़ती है और राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.
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युद्ध का असर वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा: आदित्य मल्होत्रा
अदित्य मल्होत्रा ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि इजरायल-ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है. इसका प्रभाव भारत समेत कई देशों के बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति में विदेशों में काम कर रहे प्रवासी कर्मचारी अपने देश लौट आते हैं, जिससे खासकर ग्रामीण इलाकों में रोजगार का संकट और गहरा जाता है. उन्होंने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में प्रवासी कर्मचारी हर महीने लगभग 2500 करोड़ रुपये अपने देश भेजते हैं, लेकिन युद्ध और अस्थिरता के समय यह आर्थिक प्रवाह भी प्रभावित होता है. ऐसे समय में चैंबर केंद्र सरकार के साथ मजबूती से खड़ा है और व्यापार में लाभ-हानि से ऊपर उठकर देशहित में काम करने को प्राथमिकता दे रहा है.
आत्मनिर्भरता ही भविष्य का रास्ता
उन्होंने कहा कि भारत को अपनी खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना चाहिए ताकि दूसरे देशों पर निर्भरता कम हो सके. युद्ध का नुकसान अंततः सभी देशों और समाजों को उठाना पड़ता है, इसलिए आत्मनिर्भरता ही भविष्य का रास्ता है. झारखंड की संभावनाओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में व्यापार और उद्योग के लिए अपार अवसर मौजूद हैं. खासकर पर्यटन क्षेत्र अभी भी काफी हद तक अछूता है. यदि सरकार गंभीरता से काम करे तो पर्यटन के माध्यम से हजारों युवाओं को रोजगार मिल सकता है.
झारखंड में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं
उन्होंने बताया कि चैंबर की कोशिश है कि सरकार के साथ मिलकर झारखंड के नए पर्यटन स्थलों को चिन्हित किया जाए और वहां के ग्रामीण युवाओं को “पर्यटन मित्र” के रूप में प्रशिक्षित किया जाए. इससे गांवों में रोजगार बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. खनिज संपदा पर उन्होंने कहा कि झारखंड खनिजों से समृद्ध राज्य है, लेकिन यहां से कच्चा माल बाहर भेजा जाता है और दूसरे राज्यों या देशों में उससे तैयार उत्पाद बनाए जाते हैं. इससे झारखंड के युवाओं को रोजगार का पूरा लाभ नहीं मिल पाता. उन्होंने मांग की कि झारखंड में ही फैक्ट्रियां स्थापित हों और यहीं मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिले, ताकि राज्य में उद्योग और रोजगार दोनों का विस्तार हो सके.
आईटी सेक्टर की कंपनियां झारखंड में खोलें ऑफिस
व्यापार और अंतरराष्ट्रीय निवेश को बढ़ावा देने के लिए चैंबर ने बड़ा कदम उठाते हुए 110 देशों के दूतावासों को पत्र भेजा है. इन पत्रों के माध्यम से ट्रेड एक्सपर्ट्स को झारखंड आने का निमंत्रण दिया गया है ताकि राज्य में इंपोर्ट-एक्सपोर्ट, निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नए अवसर विकसित किए जा सकें. आईटी सेक्टर को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा 100 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है और चैंबर की कोशिश है कि देश की बड़ी आईटी कंपनियां झारखंड में अपने कार्यालय खोलें. इससे राज्य में आधुनिक उद्योगों का विकास होगा और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा. अंत में उन्होंने कहा कि झारखंड में व्यापार, उद्योग और रोजगार की असीम संभावनाएं हैं. जरूरत सिर्फ दूरदृष्टि, मजबूत नीति और सरकार-उद्योग जगत के बेहतर समन्वय की है. चैंबर इसी दिशा में लगातार काम कर रहा है ताकि झारखंड आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और मजबूत राज्य बन सके.
