- 14वीं जेपीएससी और जेपीएससी बैकलॉग परीक्षा रद्द करने की घोषणा
- टीडीपीएल के जरिए हुई सभी परीक्षाओं की उच्चस्तरीय जांच होगी.
- जिन्होंने कभी तिरंगा नहीं ढोया, वे आज तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं
- परजीवी की तरह अलग-अलग स्रोतों से जीवित हैं विपक्ष के लोग
Ranchi: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन की दूसरी पाली में सदन का राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया. विपक्ष के भारी हंगामे और शोर-शराबे के बीच जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मोर्चा संभाला, तो उनका अंदाज पूरी तरह आक्रामक, तार्किक और बेबाक था. मुख्यमंत्री ने विपक्ष के हर एक राजनीतिक पैंतरे की धज्जियां उड़ाते हुए एक-एक कर कई बड़े खुलासे किए और बड़े प्रशासनिक फैसले सुनाए. सदन के अंदर विपक्ष के लगातार हो रहे हंगामे को देखते हुए सीएम हेमंत सोरेन ने तंज कसते हुए कहा,थोड़ा समय हमें भी बोलने के लिए दे दो भाई! बहुत ऐसी बात बताऊंगा, जिससे आपलोग खुशी से उछल पड़ेंगे. इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए सदन के सभी सदस्यों से सदन के नेता (मुख्यमंत्री) को शांति से सुनने का आग्रह किया. इसके बाद मुख्यमंत्री ने अपनी बात रखते हुए विपक्ष के राजनीतिक चरित्र, दोहरे मानदंडों और उनकी कुंठाओं की परतें एक-एक कर खंगालनी शुरू कर दीं.
इनकी आकांक्षाओं को पूरा करते-करते कितने जन्म लग जाएं, पता नहीं
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के साथियों को वर्तमान सरकार से काफी आशाएं और उम्मीदें हैं, लेकिन इनकी महत्वाकांक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरा करते-करते कितने जन्म बीत जाएंगे, यह वे खुद भी नहीं जानते. सीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को इनपर निर्भर रहने या इनके किसी भी सहारे की कोई आवश्यकता नहीं है. पिछले दो-चार दिनों से जो राजनीतिक प्रकरण और नौटंकी चल रही है, अब उसमें कोई रस या दम बचा ही नहीं है. विपक्ष के लोग अक्सर अलग-अलग तरीकों और साजिशों के आड़ में छिपकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का काम करते हैं.
गेरूआ वस्त्र पहनकर छात्रों को भ्रमित करने का आरोप
मुख्यमंत्री ने कल हुए छात्र आंदोलन और राजनीतिक ड्रामे का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान प्रशासन का धैर्य पूरी तरह अभूतपूर्व और सराहनीय था. उन्होंने सवाल उठाया कि चाहे वह लोकसभा हो, राज्यसभा, विधानसभा या विधान परिषद—देश के इन प्रमुख संवैधानिक संस्थानों के आसपास हमेशा धारा 144 लागू रहती है, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष के लोग गेरूआ वस्त्र पहनकर राज्य के मासूम छात्रों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं और उन्हें गुमराह करने का कुचक्र रच रहे हैं. मुख्यमंत्री ने चुनौती देते हुए कहा कि हम इस पूरे षड्यंत्र की परत-दर-परत हटाकर रहेंगे. उन्होंने कहा कि हमारे पास विपक्ष जैसी वो साधन-व्यवस्था और धनबल नहीं है, जिसके दम पर ये विपक्ष के लोग आसमान में उड़ रहे हैं. विभिन्न संस्थाओं का दुरुपयोग कर ये लोग सदन की गरिमा को लगातार तार-तार करने का काम कर रहे हैं.
जिन्होंने कभी तिरंगा नहीं ढोया, वे आज तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के देशभक्ति और आंदोलनों के दावों पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने बेहद तीखे अंदाज में कहा- “जिन्होंने अपने पूरे जीवन में कभी तिरंगा नहीं ढोया, वे आज तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं.” सीएम ने कहा कि व्यापारियों की जमात से ताल्लुक रखने वाले इन लोगों की जेबों में नोटों के बंडल भरे पड़े हैं. इसी बेहिसाब काले धन और नोटों के बंडलों के दम पर वे लोकतंत्र को खरीदने की कोशिश कर रहे हैं. इनके और इनके चहेतों के घरों में नोटों के बंडल पड़े हुए हैं और विडंबना देखिए कि इन्होंने अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए धार्मिक स्थलों यानी मंदिरों तक को नहीं छोड़ा.
जेपीएससी परीक्षाएं रद्द, टीडीपीएल की होगी जांच
सदन के माध्यम से झारखंड के युवाओं को बड़ी सौगात देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कई ऐतिहासिक और कड़े प्रशासनिक निर्णय सुनाए. उन्होंने घोषणा की कि 14वीं जेपीएससी और जेपीएससी बैकलॉग परीक्षा को पूरी तरह रद्द किया जाएगा. टीडीपीएल के जरिए जितनी भी परीक्षाएं अब तक ली गई हैं, उन सबकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा और नीयत पूरे राज्य की जनता जानती है. विपक्ष इस बात को कभी समझ ही नहीं पाया कि राज्य हित में क्या सही है और क्या गलत है. यही कारण है कि विपक्ष को हर बार की तरह इस बार भी पूरी तरह खाली हाथ ही लौटना पड़ेगा. यह पूरा विरोध और हंगामा किसी जनहित का मुद्दा नहीं, बल्कि एक मकड़जाल है जो इन्हीं लोगों द्वारा खुद बुना गया है.
टीडीपीएल यूपी की कंपनी
सीएम ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि टीडीपीएल उत्तर प्रदेश की कंपनी है, जो वहीं से बैठकर सारा षड्यंत्र रच रही है और झारखंड के मासूम युवाओं को दिग्भ्रमित कर रही है. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच कराने और व्यवस्था में कड़े सुधार करने का निर्णय ले लिया गया है. सरकार की मंशा पूरी तरह पारदर्शी और स्पष्ट है.
“भैंस के आगे बीन बजाने से कोई फायदा नहीं”
विपक्ष के लगातार हंगामे और सदन में बाधा डालने की प्रवृत्ति पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और कल्याणकारी कामों को उनके अंजाम तक नहीं पहुंचने देने के लिए विपक्ष अपनी पूरी ताकत का गलत इस्तेमाल कर रहा है. उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि ये हल्ला करते रहेंगे, हम अपनी राह चलते रहेंगे. भैंस के आगे बीन बजाने से कोई फायदा नहीं मिलने वाला है. परीक्षा प्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के अपने विजन को साझा करते हुए सीएम ने कहा कि आने वाले समय में सिस्टम को पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए देश के शीर्ष संस्थानों जैसे आईइआइटी, आइआइएम और एक्सएलआऱआई से विशेषज्ञ राय ली जाएगी और उनके सुझावों के आधार पर बेहतर रिफॉर्म की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा.
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धूमनाथ पांडेय की कविता के जरिए विपक्ष पर अंतिम प्रहार
अपने भाषण के अंत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रसिद्ध कवि धूमनाथ पांडेय की कविता ‘गिरोह’ की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर अब तक का सबसे तीखा राजनीतिक कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि इस गिरोह के और अधिक गिरने की पूरी संभावना है. अभी तो यह पतन और गिरने की मात्र शुरुआत भर है. पूरा विश्व इस गिरोह का गिरना देख रहा है. सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि अकेले मत गिरो, रुपया और चरित्र के साथ गिरो, बेशर्मी और बेदर्दी के साथ गिरो.
हंगामे के बीच विधेयक पेश और सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
मुख्यमंत्री के इस आक्रामक संबोधन के दौरान सदन में विपक्ष का हंगामा और नारेबाजी लगातार जारी रही. विधानसभा अध्यक्ष ने बार-बार विपक्षी सदस्यों को अपनी-अपनी सीटों पर जाने का आग्रह किया, लेकिन विपक्ष अपनी जिद पर अड़ा रहा और सदन में लगातार व्यवधान डालता रहा. इसी हंगामे और शोर-शराबे के माहौल के बीच, मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में “झारखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026” पेश किया. हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने अत्यंत दुखी और भारी मन से यह घोषणा की कि यदि आपलोग इस तरह सदन नहीं चलने देंगे, तो ऐसी स्थिति में सदन की कार्रवाई को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया जाता है. इसके साथ ही सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई.
