नई दिल्ली/रांची: छत्तीसगढ़ के विजय सेंट्रल कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में दिल्ली की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय के भाई सुधीर कुमार सहाय समेत पांच आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को “संदेह से परे” साबित करने में विफल रहा. विशेष सीबीआई न्यायाधीश सुनेना शर्मा ने एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड, कंपनी के निदेशक अनिल गुप्ता, संयुक्त प्रबंध निदेशक दीपक गुप्ता, प्रबंधक अमृत सिंह और नामित निदेशक सुधीर कुमार सहाय को धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों से मुक्त कर दिया.

सीबीआई ने लगाए थे गंभीर आरोप
सीबीआई का आरोप था कि कंपनी और उससे जुड़े लोगों ने कोयला ब्लॉक आवंटन हासिल करने के लिए गलत जानकारी दी और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया. जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने कंपनी की जमीन, संपत्ति, निवेश और आवश्यक मंजूरियों को लेकर भ्रामक दावे किए थे ताकि यह दिखाया जा सके कि कंपनी परियोजना शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है. सीबीआई ने यह भी कहा था कि आरोपियों ने आपसी साजिश के तहत कोयला मंत्रालय को गुमराह कर एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड के पक्ष में कोयला ब्लॉक का आवंटन करवाया.
अदालत ने क्या कहा?
23 मई को सुनाए गए 271 पन्नों के फैसले में अदालत ने कहा कि पेश किए गए साक्ष्य इतने मजबूत नहीं हैं कि यह साबित किया जा सके कि आरोपियों ने धोखाधड़ी, बेईमानी या किसी प्रकार का गलत लाभ उठाने का प्रयास किया था. अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मामला साबित नहीं होता है. साथ ही अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोपों को ठोस तरीके से सिद्ध नहीं कर पाया.
अब भी लंबित हैं कई मामले
गौरतलब है कि कथित कोयला घोटाले से जुड़े मामलों में सीबीआई ने 50 से अधिक केस दर्ज किए थे. इनमें से 27 मामलों का निपटारा हो चुका है, जबकि 25 से ज्यादा भ्रष्टाचार से जुड़े मामले अब भी विशेष अदालतों में लंबित हैं. वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 16 जनवरी 2025 को उच्चतम न्यायालय को बताया था कि धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज 45 शिकायतें, जिनमें पूरक शिकायतें भी शामिल हैं, अभी लंबित हैं.
2014 में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किए थे 214 कोल ब्लॉक
उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2014 में बड़ा फैसला सुनाते हुए 1993 से 2010 के बीच केंद्र सरकार द्वारा आवंटित 214 कोयला ब्लॉकों को रद्द कर दिया था. अदालत ने यह निर्णय जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया था. इसके बाद इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष सीबीआई अदालतों का गठन किया गया था.
