Ranchi : ऐसा नहीं है कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के दौरान ही झारखंड की गठबंधन सरकार में ऊंच-नीच देखने को मिल रहा है. इससे पहले भी जेएमएम और कांग्रेस के बीच कहा-सुनी की खबरें राजनीतिक गलियारे में तैरते हुई देखी जा रही थी. दोनों पार्टियों की तरफ से कितनी भी ऑल इज वेल की बात कही जाए, लेकिन सच यह है कि ऐसा नहीं है. कांग्रेस के विधायक और कार्यकर्ता जेएमएम से उतने खुश नहीं हैं, जितने कि होने चाहिए. कांग्रेसी विधायकों और कार्यकर्ताओं ने अपने प्रदेश स्तर के शीर्ष नेताओं पर दबाव बनाया. उनसे कहा गया कि दिल्ली में बैठे बड़े पदाधिकारियों को इस बात की सूचना दी जाए कि किस तरह कांग्रेस झारखंड में दबाव में है. शीर्ष नेताओं ने ऐसा ही किया. उन्होंने कांग्रेस के दिल्ली में बैठे बड़े पदाधिकारियों को इस बात की सूचना और जानकारी दी कि कैसे वे दबाव में काम कर रहे हैं. लेकिन जो जवाब मिला, उससे झारखंड के कांग्रेसियों पर दबाव और बढ़ गया.
सामंजस्य बनाए और गठबंधन को दे मजबूती
कांग्रेस के प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों की शिकायत सुनने के बाद बड़े ही स्पष्ट तरीके से इन्हें जवाब दिया गया. आलाकमान की तरफ से जो निर्देश दिए गए वो प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के लिए चौंकाने वाला था. पहले तो थोड़े कड़े लहजे में उन्हें कहा गया कि “चलिए तब आपको पूरे राज्य का मुखिया बना देते हैं. फिर आप सारी चीजों को ठीक कर लेंगे क्या?” आलाकमान की तरफ से साफ कहा गया कि आपस में आपलोग सामंजस्य बनाए रखें. कार्यप्रणाली ऐसी होनी चाहिए कि शिकायत का मौका ना मिला. साफ कहा गया कि कोई पार्टी पहले अपने बारे में सोचेगी फिर गठबंधन की दूसरी पार्टियों के बारे में. ऐसे में जो भी करना है वो प्रदेश में मौजूद कांग्रेसियों को करना है. किसी भी तरह की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए. उनसे यह भी कहा गया कि जरूरत पड़ने पर कड़ाई से भी निपटिये. लेकिन गठबंधन में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए. वहीं दूसरी ओर राज्यसभा चुनाव को लेकर भी कहा गया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि गठबंधन के सभी विधायक अपने ही उम्मीदवार को वोट करें. किसी भी हाल में क्रॉस वोटिंग की घटना नहीं होनी चाहिए.
नाथवानी की इंट्री के बाद से ही बैकफुट पर है कांग्रेस
राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय और बीजेपी समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी की इंट्री के बाद से ही कांग्रेस असहज स्थिति में है. शिकायत के बाद भी परिमल नाथवानी का नामांकन रद्द नहीं हो सका. इस घटना के बाद कांग्रेस को बैकफुट पर साफ तौर से देखा जा रहा है. राजनीतिक गलियारों में यह बात हो रही है कि नाथवानी कांग्रेस का खेल खराब कर सकते हैं. गठबंधन में जरूरी आंकड़ा होने के बावजूद परिमल नाथवानी खेला कर सकते हैं. 18 जून को वोटिंग होनी है. उससे पहले रांची से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस खेमे में खलबली साफ तौर से देखी जा सकती है.
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