कांग्रेस विधायक दल की बैठक: बोले प्रदीप, मकसद सिर्फ सीट नहीं, भाजपा को रोकना है

Ranchi: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है. सीटों...

Ranchi: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है. सीटों के तालमेल और उम्मीदवारी को लेकर सत्तारूढ़ इंडी गठबंधन के दो बड़े घटक दलों झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच खींचतान अब खुलेआम सड़क और सोशल मीडिया पर आ गई है. कांग्रेस द्वारा एकतरफा फैसला लेते हुए प्रणव झा को अपना उम्मीदवार घोषित करने के बाद झामुमो जहां बेहद क्षुब्ध है, वहीं खुद कांग्रेस के अंदरूनी खेमे में भी इस फैसले को लेकर असंतोष की चिंगारियां सुलगने लगी हैं. इस शह-मात के खेल के बीच अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू के बीच शनिवार को होने वाली हाई-प्रोफाइल बैठक पर टिक गई हैं.

बीजेपी को रोकना ही हमारा मुख्य मकसदः प्रदीप यादव

शनिवार को आयोजित कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद सियासी गलियारों में हलचल और तेज हो गई. बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने गठबंधन को बचाने की कोशिश करते हुए कहा, बात सिर्फ एक राज्यसभा सीट की नहीं है, बल्कि बात भाजपा जैसी सांप्रदायिक ताकत को एकजुट होकर रोकने की है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जब हमारे प्रभारी और वरिष्ठ नेताओं की बात होगी, तो सारी चीजें पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगी. उन्होंने यह भी माना कि झामुमो और कांग्रेस के बीच जो कड़वाहट या खाई पैदा हुई है, उसे पाटने का गंभीर प्रयास किया जा रहा है. इसी बीच कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए पार्टी विधायकों को दो टूक कह दिया है कि हाईकमान का जो भी फैसला है, उसे पार्टी के हर विधायक को हर हाल में मानना होगा.

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खुद कांग्रेस के भीतर भड़की असंतोष की आग, दिग्गजों ने खोले मोर्चे

दिलचस्प बात यह है कि इस फैसले से सिर्फ झामुमो ही नाराज नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी अंतर्कलह खुलकर सामने आ गई है. प्रणव झा को टिकट मिलने के बाद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखा, जिससे उनकी असहमति और दुख साफ झलक रहा है. वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने तो सोशल मीडिया पर खुलेआम अपनी गहरी नाराजगी दर्ज कराई है. अल्पसंख्यक कोटे से दावेदारी ठोक रहे शहजादा अनवर ने टिकट न मिलने पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी में अकलियत का सम्मान नहीं हुआ.

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