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हजारीबाग नगर निगम में विवाद गहराया, महापौर ने नगर आयुक्त पर लगाए गंभीर आरोप

Hazaribagh: नगर निगम में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर हजारीबाग महापौर अरविंद राणा और नगर आयुक्त के बीच टकराव तेज हो गया है....

Hazaribagh Mayor
हजारीबाग महापौर अरविंद राणा

Hazaribagh: नगर निगम में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर हजारीबाग महापौर अरविंद राणा और नगर आयुक्त के बीच टकराव तेज हो गया है. महापौर ने आरोप लगाया है कि निगम में जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है और उन्हें काम करने से रोका जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है.

प्रावधानों का नहीं हो रहा पालन

हजारीबाग महापौर अरविन्द कुमार राणा ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 243 और झारखंड म्युनिसिपल एक्ट 2011 में महापौर को निगम का प्रथम नागरिक एवं लोक सेवक माना गया है, लेकिन हजारीबाग में इन प्रावधानों का पालन नहीं हो रहा है. उन्होंने 25 अप्रैल को आयोजित बोर्ड बैठक का जिक्र करते हुए कहा, कि बैठक के दौरान नियमों की अनदेखी की गई और आयुक्त द्वारा बीच बैठक में ही एएमसी को जिम्मेदारी सौंपकर चले जाना पूरी तरह अनुचित था. महापौर के अनुसार, बिना किसी आपात स्थिति के ऐसा निर्णय लेना बोर्ड की गरिमा और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का उल्लंघन है.

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नियमों को तोड़-मरोड़ कर किया गया प्रस्तुत

महापौर ने 22 अप्रैल को जारी पत्र को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि म्युनिसिपल एक्ट की धारा 33 का गलत हवाला देकर नियमों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया. उन्होंने निगम की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि शहर में जगह-जगह कचरे का अंबार लगा है, करोड़ों रुपये के वाहन बिना उपयोग के कबाड़ बनते जा रहे हैं और विकास कार्यों की कोई ठोस योजना नजर नहीं आ रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें फाइलों का निरीक्षण करने नहीं दिया जा रहा, समीक्षा बैठक करने से रोका जा रहा है और योजनाओं की जानकारी भी साझा नहीं की जा रही है. यह जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का सीधा हनन है.

निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार कर फाइलों का हो रहा निपटान

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मीडिया में बयान देने के लिए भी आयुक्त से अनुमति लेने को कहा जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है. आयुक्त द्वारा निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार कर फाइलों का निपटान किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे जनहित के मुद्दों पर चुप नहीं बैठेंगे और जनप्रतिनिधियों के सम्मान व अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा.

महापौर ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है और नगर निगम में कानून व प्रोटोकॉल के सख्ती से पालन की आवश्यकता जताई है. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है.

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