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विनोबा भावे विश्वविद्यालय में स्थायी कुलसचिव का संकट बरकरार, पांच साल से प्रभार पर चल रहा कामकाज

Hazaribagh: झारखंड के उच्च शिक्षा जगत के प्रमुख संस्थानों में शुमार विनोबा भावे विश्वविद्यालय पिछले लगभग पांच वर्षों से नियमित कुलसचिव के...

Hazaribagh: झारखंड के उच्च शिक्षा जगत के प्रमुख संस्थानों में शुमार विनोबा भावे विश्वविद्यालय पिछले लगभग पांच वर्षों से नियमित कुलसचिव के बिना संचालित हो रहा है. वर्ष 2021 के बाद से विश्वविद्यालय में इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर स्थायी नियुक्ति नहीं हो सकी है. जिसके कारण विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कार्यप्रणाली.

नीतिगत निर्णयों और दीर्घकालिक योजनाओं पर सवाल खड़े होने लगे हैं. विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे में कुलसचिव का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. यह पद विश्वविद्यालय के दैनिक प्रशासन. विभिन्न विभागों के समन्वय. सरकारी पत्राचार. बैठक संचालन और नीतिगत निर्णयों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालता है. ऐसे में लंबे समय तक नियमित नियुक्ति न होना विश्वविद्यालय की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है.

2021 के बाद नहीं हुई स्थायी नियुक्ति

जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय में वर्ष 2021 के बाद नियमित कुलसचिव की नियुक्ति नहीं की गई है. तब से यह जिम्मेदारी प्रभार के आधार पर अलग-अलग अधिकारियों को सौंपी जाती रही है. इससे प्रशासनिक निरंतरता और जवाबदेही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. विश्वविद्यालय से जुड़े कई शिक्षकों और कर्मचारियों का मानना है कि महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर स्थायी नियुक्ति नहीं होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है. तथा दीर्घकालिक योजनाओं के क्रियान्वयन में भी बाधाएं उत्पन्न होती हैं.

नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन परिणाम नहीं

सूत्रों के अनुसार कुलसचिव पद पर नियुक्ति के लिए राज्य सरकार स्तर पर प्रक्रिया आरंभ की गई थी. प्रशासनिक सचिवालय द्वारा आवेदन आमंत्रित किए गए और अभ्यर्थियों का साक्षात्कार भी आयोजित किया गया. इसके बावजूद अंतिम नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है. बताया जाता है कि वर्ष 2025 में भी नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई थी. लेकिन वह भी किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी. इससे विश्वविद्यालय समुदाय में निराशा का माहौल है.

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विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने बढ़ती चुनौतियां

शिक्षकों और छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय जैसे बड़े संस्थान में कुलसचिव का पद लंबे समय तक रिक्त रहना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता. विश्वविद्यालय में परीक्षा संचालन. वित्तीय मामलों. कर्मचारियों से जुड़े प्रकरणों. सरकारी निर्देशों के अनुपालन और शैक्षणिक गतिविधियों के समन्वय में कुलसचिव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. नियमित अधिकारी के अभाव में कई बार निर्णय लेने की गति प्रभावित होती है. और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में भी अस्थिरता देखी जाती है.

शिक्षकों और विद्यार्थियों में चिंता

विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षकों और विद्यार्थियों का मानना है कि प्रशासनिक नेतृत्व की स्थिरता किसी भी शैक्षणिक संस्थान के विकास के लिए आवश्यक है. उनका कहना है कि नियमित नियुक्ति से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी. बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध गतिविधियों को भी नई दिशा मिलेगी.

जल्द नियुक्ति की उठी मांग

शिक्षक संगठनों और विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों ने राज्य सरकार से जल्द से जल्द नियमित कुलसचिव की नियुक्ति करने की मांग की है. उनका कहना है कि इससे विश्वविद्यालय में प्रशासनिक पारदर्शिता. जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ेगी. तथा लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आएगी.

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