टीबी उन्मूलन पर राष्ट्रीय मंथन, झारखंड में जुटे 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि

Ranchi: टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को लेकर आयोजित नेशनल टास्क फोर्स की बैठक में स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार और स्वास्थ्य मंत्री...

Ranchi: टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को लेकर आयोजित नेशनल टास्क फोर्स की बैठक में स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने टीबी उन्मूलन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की रणनीति, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की.

दुनिया के 25 प्रतिशत टीबी मरीज भारत में, इसलिए केंद्र का विशेष फोकस

स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार ने कहा कि भारत सरकार का टीबी पर विशेष फोकस इसलिए है क्योंकि दुनिया के लगभग 25 प्रतिशत टीबी मरीज भारत में हैं. उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी चुनौती है, लेकिन राहत की बात यह है कि टीबी के इलाज के लिए देश में सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं और इस बीमारी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. अजय कुमार ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देशवासियों का स्वस्थ होना जरूरी है. जब तक लोग स्वस्थ नहीं होंगे, तब तक विकसित राष्ट्र का सपना पूरा नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि लगभग सभी राज्यों में टीबी मरीजों का प्रतिशत समान है और सामाजिक सहभागिता बढ़ाकर इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है.

टीबी मुक्त भारत अभियान में CHO और मेडिकल कॉलेजों की अहम भूमिका

उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) और मेडिकल कॉलेज टीबी उन्मूलन अभियान की रीढ़ हैं. CHO को और अधिक प्रशिक्षण देने की जरूरत है ताकि वे जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से काम कर सकें. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मंशा है कि सभी बीमारियों और मरीजों का व्यापक डाटा तैयार किया जाए, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी सहयोग लिया जाएगा.

झारखंड में पहली बार डॉक्टर को मिला स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बैठक में देशभर से आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए केंद्र सरकार लगातार मॉनिटरिंग कर रही है और राज्य सरकार सभी जिलों में अभियान चलाकर केंद्र की गाइडलाइन का पालन कर रही है. उन्होंने कहा कि इससे पहले यह बैठक शिमला में आयोजित हुई थी और इसका आयोजन प्रत्येक दो वर्ष पर होता है.

टीबी, कुष्ठ, मलेरिया और थैलेसीमिया पर और काम करने की जरूरत

डॉ. अंसारी ने कहा कि झारखंड में पहली बार किसी डॉक्टर को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया है, इसलिए वह स्वास्थ्य संबंधी सेमिनारों और कार्यक्रमों से सीधे जुड़ने का प्रयास करते हैं. उन्होंने कहा कि टीबी, कुष्ठ रोग, मलेरिया और थैलेसीमिया जैसी बीमारियों के खिलाफ अभी और व्यापक स्तर पर काम करने की आवश्यकता है.

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पंचायत स्तर तक स्क्रीनिंग अभियान, मरीजों को मिल रही आर्थिक सहायता

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि टीबी मरीजों की बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग कराई जाएगी. पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर अभियान चलाया जा रहा है और सरकार हर संभव सहायता उपलब्ध करा रही है. उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों को पोषण सहायता के रूप में सरकार की ओर से प्रतिमाह एक हजार रुपये दिए जाते हैं.

2029 तक टीबी मुक्त झारखंड का लक्ष्य

डॉ. अंसारी ने कहा कि राज्य में वर्तमान में लगभग छह हजार टीबी मरीज हैं. सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक झारखंड को टीबी मुक्त राज्य बनाना है. उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में यह लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा.

रिम्स-2 बनेगा एशिया का सबसे बड़ा मेडिकल अस्पताल

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में रिम्स-2 के निर्माण की दिशा में तेजी से काम हो रहा है, जिसे एशिया के सबसे बड़े मेडिकल अस्पतालों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है.

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