Ranchi: झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) की करोड़ों रुपये से जुड़ी मैनपावर रेट कॉन्ट्रैक्ट निविदा अब गंभीर विवादों में घिर गई है. तकनीकी मूल्यांकन में 24 में से 21 कंपनियों को बाहर किए जाने के बाद स्थानीय MSME इकाइयों ने पूरी प्रक्रिया पर सवालों की बौछार कर दी है. मामले ने अब टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और स्थानीय उद्यमों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है. जानकारी के अनुसार, निविदा संख्या MRE/33/245/2023-24/1861 में कुल 24 कंपनियों ने भाग लिया था. लेकिन तकनीकी जांच के बाद सिर्फ तीन कंपनियों को ही योग्य घोषित किया गया. इनमें दो कंपनियां बिहार के पटना की हैं, जबकि एक झारखंड की है. बाकी 21 कंपनियां विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए अयोग्य घोषित कर दी गईं.
कोरिजेंडम ने बढ़ाया विवाद
सबसे बड़ा सवाल उस शुद्धिपत्र (कोरिजेंडम) को लेकर उठ रहा है, जिसे निविदा की अंतिम तिथि वाले दिन जारी किया गया था. इस संशोधन में चयनित एजेंसियों की संख्या 3 से बढ़ाकर 5 कर दी गई थी. स्थानीय MSME कंपनी का आरोप है कि जब JEPC ने खुद चयन की संख्या बढ़ाकर 5 कर दी थी, तो फिर केवल 3 कंपनियों को ही योग्य क्यों ठहराया गया? बाकी दो स्थान खाली क्यों छोड़ दिए गए? क्या अन्य कंपनियों को मौका देने की बजाय उन्हें तकनीकी आधार पर बाहर करने की जल्दबाजी दिखाई गई?

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स्थानीय उद्योगों के साथ भेदभाव का आरोप
शिकायतकर्ता कंपनी ने दावा किया है कि झारखंड सरकार की MSME नीति स्थानीय उद्यमों को प्राथमिकता देने की बात करती है, लेकिन इस निविदा में स्थानीय कंपनियों के हितों की अनदेखी की गई. आरोप है कि बाहरी कंपनियों को लाभ पहुंचाने और स्थानीय उद्यमों को प्रतिस्पर्धा से बाहर करने की कोशिश की गई.
राज्य परियोजना निदेशक को शिकायत
मामले को लेकर स्थानीय MSME इकाई ने राज्य परियोजना निदेशक को लिखित शिकायत सौंपकर पूरी निविदा प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच, तकनीकी मूल्यांकन की समीक्षा और स्थानीय MSME इकाइयों को नियमानुसार प्राथमिकता देने की मांग की है.
