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सदर अस्पताल के बाहर ‘मौत का जाम’, शराबखोरी का अड्डा बनी एंबुलेंस, नशे में मरीजों की जिंदगी से खेल रहे चालक

Giridih: जिस एंबुलेंस पर लोग अपनी आखिरी उम्मीद टिकाकर अस्पताल पहुंचते हैं, अगर वही एंबुलेंस शराबखोरी का अड्डा बन जाए तो इसे...

Giridih: जिस एंबुलेंस पर लोग अपनी आखिरी उम्मीद टिकाकर अस्पताल पहुंचते हैं, अगर वही एंबुलेंस शराबखोरी का अड्डा बन जाए तो इसे क्या कहा जाए? गिरिडीह सदर अस्पताल के बाहर इन दिनों कुछ ऐसा ही शर्मनाक और खतरनाक नजारा देखने को मिल रहा है. जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के मुख्य गेट के सामने खड़ी प्राइवेट एंबुलेंस रात ढलते ही “चलती-फिरती बार” में तब्दील हो जाती हैं.

संवेदनशील इलाके में खुली शराबखोरी

हैरानी की बात यह है कि यह सब उस जगह हो रहा है, जहां से कुछ कदम की दूरी पर कोर्ट, जिला परिषद कार्यालय और धार्मिक स्थल शांति भवन मंदिर मौजूद है. बावजूद इसके, अस्पताल परिसर के बाहर खुलेआम शराब की बोतलें खुल रही हैं, ड्राइवरों का जमावड़ा लग रहा है और रातभर नशे की महफिल सज रही है.

रोज बन रहा है शराब पार्टी का अड्डा

स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह कोई एक-दो दिन की घटना नहीं बल्कि रोज का सिलसिला बन चुका है. देर शाम होते ही एंबुलेंस के अंदर और आसपास शराब पार्टी शुरू हो जाती है. कई बार तो शराब के नशे में चालक सड़क पर हंगामा करते भी देखे गए हैं. सबसे गंभीर सवाल यह है कि यही चालक कुछ देर बाद गंभीर मरीजों को लेकर सड़क पर दौड़ पड़ते हैं. ऐसे में मरीजों की जिंदगी किस भरोसे छोड़ी जा रही है?

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मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़

सदर अस्पताल से रेफर होने वाले मरीज पहले ही गंभीर हालत में होते हैं. परिजन एंबुलेंस को सुरक्षित मानकर उसमें मरीज को बैठाते हैं, लेकिन उन्हें क्या पता कि जिस चालक के हाथ में स्टीयरिंग है, वह शराब के नशे में धुत हो सकता है.

नशे में वाहन चलाना वैसे ही अपराध है. ऊपर से मरीजों को लेकर तेज रफ्तार में दौड़ती एंबुलेंस किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकती है. अगर रास्ते में कोई दुर्घटना हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की चुप्पी पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर खड़ा हो रहा है. अस्पताल के मुख्य द्वार के सामने रोजाना यह सब हो रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चुप्पी दिखाई दे रही है. क्या प्रशासन को यह सब नजर नहीं आता, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?

अस्पताल परिसर जैसी संवेदनशील जगह के बाहर शराबखोरी होना न सिर्फ कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाना है, बल्कि यह इंसानियत के खिलाफ भी है. मरीजों और उनके परिजनों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि अगर जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है.

लोगों ने की सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल के बाहर खड़ी प्राइवेट एंबुलेंस की नियमित जांच हो, शराब पीने वाले चालकों पर सख्त कार्रवाई की जाए और अस्पताल परिसर के आसपास पुलिस गश्ती बढ़ाई जाए.

अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर मरीजों की जिंदगी यूं ही नशे के हवाले होती रहेगी.

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