विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: रिम्स के लिए अधिग्रहित भूमि से जुड़े जमीन घोटाला मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पूरे घोटाले की परत-दर-परत खुलती जा रही है.

ACB जांच में खुलासा
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस पूरे अरबों रुपये के जमीन घोटाले की नींव बड़गाईं अंचल के तत्कालीन अंचल अधिकारी राजेश कुमार की संलिप्तता और सोची-समझी जालसाजी पर टिकी थी. सरकारी संरक्षण में रहने वाली भूमि को भू-माफियाओं के हवाले करने में इस अधिकारी ने मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभाई.
SAR कोर्ट का आदेश
मामले की गहराई में जाएं तो साल 1992-1993 में ही SAR कोर्ट ने सोनमैत देवी के मालिकाना हक को पूरी तरह खारिज कर दिया था. कोर्ट ने तब स्पष्ट निर्देश दिया था कि इस बेशकीमती जमीन को अंचल अधिकारी की कस्टडी और संरक्षण में सुरक्षित रखा जाए. कोर्ट के इस सख्त आदेश को बाकायदा सरकारी रिकॉर्ड यानी रजिस्टर-II में भी दर्ज किया गया था कि वास्तविक रैयत की पहचान होने तक यह पूरी तरह से सरकारी जमीन रहेगी.
फर्जी रसीद बनी घोटाले का आधार
लेकिन इस स्पष्ट कानूनी आदेश और पुख्ता सरकारी रिकॉर्ड के बावजूद तत्कालीन CO राजेश कुमार ने अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर और जानबूझकर आधिकारिक रिकॉर्ड की अनदेखी की तथा सरकारी कस्टडी की इस जमीन को निजी संपत्ति के रूप में दिखाने के लिए सोनमैत देवी के नाम पर फर्जी लगान रसीद काट दी. राजेश कुमार द्वारा काटी गई यही फर्जी रसीद आगे चलकर इस पूरे महाघोटाले का मुख्य आधार बनी, जिसके दम पर सरकारी भूमि को निजी हाथों में सौंपकर भारी अवैध मुनाफा कमाया गया.
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अतिक्रमण बचाने की रणनीति
इस सिंडिकेट ने अंचल अधिकारी से मिली शह के बाद प्रशासन और रिम्स प्रबंधन की कार्रवाई से बचने के लिए एक और घिनौनी रणनीति अपनाई. इस अवैध रूप से हथियाई गई जमीन पर आवासीय और कमर्शियल इमारतें खड़ी करने के साथ-साथ वहां मंदिरों का निर्माण कराया गया और कुछ हिस्सों को आदिवासियों के पवित्र सरना स्थल के रूप में सीमांकित कर दिया गया, ताकि जनता की सहानुभूति बटोरकर अतिक्रमण हटाने की किसी भी कार्रवाई को रोका जा सके.
जांच जारी
हाईकोर्ट के आदेश के बाद ACB इस पूरे मामले की जांच कर रही है. अब तक एजेंसी ने आधा दर्जन से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है.


