Ranchi: रांची सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) शशि भूषण शर्मा की अदालत ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में पीड़िता कुमकुम शिवा के पक्ष में कुछ महीने पहले एक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पीड़िता के पति कुमार चिरंजीव झा, ससुर मुंद्रिका झा और सास रुना झा को घरेलू हिंसा में संलिप्त मानते हुए पीड़िता को एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था. इसके साथ ही अदालत ने ससुराल वालों को निर्देश दिया है कि वे पीड़िता को उसके ससुराल में रहने की अनुमति दें, या फिर उसके स्तर के वैकल्पिक आवास या चार हजार रुपए प्रति माह किराए के लिए दें.
कुमकुम को देख ससुराल वालों ने दरवाजा किया बंद
अदालत ने धुर्वा थाना प्रभारी और बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) को इस आदेश का अनुपालना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था लेकिन आदेश के 2 महीने बीत जाने के बाद भी आदेश का अनुपालन नहीं हुआ और पीड़िता को उसके ससुराल में रहने नहीं दिया जा रहा. कोर्ट के आदेश के बाद पीड़िता कुमकुम शिवा शुक्रवार की शाम अपने ससुराल में रहने के लिए गई लेकिन उसके ससुराल वालों ने उसे देखते ही दरवाजा बंद कर लिया. जिसके बाद कुमकुम शिवा देर रात तक अपने ससुराल के आंगन में ही बैठी रही.
दहेज के लिए कुमकुम को किया गया था प्रताड़ित
कुमकुम शिवा की शादी चिरंजीव झा के साथ 18 अप्रैल 2018 कोहुई थी. आरोपों के मुताबिक शादी के दौरान कुमकुम के ससुराल वालों ने 8 लाख दहेज की मांग की थी लेकिन उसके पिता केवल 5 लाख ही दे पाए थे. कोर्ट में पेश किए गए गवाहों और साक्ष्यों के मुताबिक ससुराल वालों द्वारा पीड़िता को कमरे में बंद कर प्रताड़ित किया जाता था. पर्याप्त भोजन नहीं दिया जाता था और उसके चरित्र पर झूठे लांछन लगाए जाते थे क्रूरता की हद तब पार हो गई जब दूसरी गर्भावस्था के दौरान पीड़िता को धोखे से ठंडे पेय में गर्भपात की दवा मिलाकर पिला दी गई. जिससे उसका गर्भपात हो गया. 31 जुलाई 2019 को धुर्वा पुलिस की मदद से पीड़िता को बंद कमरे से मुक्त कराया गया था.



