Bermo: बेरमो अनुमंडल के बोकारो थर्मल जीएम कॉलोनी स्थित वैष्णो माता मंदिर के संचालन को लेकर उपजा विवाद अब थमता नजर नहीं आ रहा है. मंदिर के फाउंडर सकूजा परविार द्वारा मंदिर प्रबंधन हेतु बनाए गए ट्रस्ट और सत्रह सदस्यीय महिलाओं की कमेटी के गठन के बाद से ही कॉलोनी सहित आसपास की निजी काॅलोनियों के लोगों में नाराजगी है. स्थानीय लोग इस नवनिर्मित ट्रस्ट और कमेटी की वैधता को मानने से साफ इनकार कर रहे हैं. इसी विरोध के सिलसिले में मंदिर के समीप बेरमो विधायक मद से निर्मित शेड (वैष्णो मंदिर प्रांगण) में लोगों की एक बैठक सोमवार की रात आयोजित की गई.
ट्रस्ट का कोई उचित रजिस्ट्रेशन नहीं
गोविंदपुर डी पंचायत की मुखिया चंदना मिश्रा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वर्तमान ट्रस्ट को समाप्त कर नए सिरे से लोकतांत्रिक तरीके से नई समिति के गठन की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई. बैठक में मुख्य रूप से मौजूद गोविंदपुर बी के मुखिया चंद्रदेव घासी, सी के मुखिया विकास सिंह, महिला कांग्रेस नेत्री सुषमा कुमारी, रिंकू सिंह, भाजपा किसान मोर्चा के झारखंड प्रदेश सदस्य मोतीलाल महतो और श्रीभगवान यादव ने लोगों की मांग का समर्थन किया. इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि वैष्णो मंदिर के नाम पर कुछ व्यक्तियों द्वारा बनाए गए इस ट्रस्ट का कोई उचित रजिस्ट्रेशन नहीं है, इसलिए आम जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी. वर्तमान ट्रस्ट की जांच और कानूनी राय लेने के बाद ही सर्वसम्मत निर्णय लिया जाएगा.
मुखिया विकास सिंह ने बताया कि आगामी 27 जून को मंदिर का स्थापना समारोह मनाया जाना है और इस आयोजन से पूर्व ही सभी की सहमति से एक नई और कमेटी का गठन कर लिया जाएगा. वहीं, चंद्रदेव घासी ने उपस्थित लोगों से पूरी जानकारी साझा करते हुए फिलहाल धैर्य रखने और 27 जून तक पुराने ट्रस्ट के सदस्यों से वार्ता करने की बात कही. उन्होंने कहा कि यदि वे सुधार के लिए तैयार नहीं होते हैं, तो ग्राम सभा के माध्यम से नई कमेटी चुनी जाएगी.
35 वर्षों तक सुदेश बाला सकूजा द्वारा किया गया मंदिर का संचालन
बता दें, कि इस प्रसिद्ध मंदिर के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने से लेकर पिछले 35 वर्षों तक इसके संचालन, रख-रखाव और अनवरत सेवा का कार्य सकूजा परिवार की सुदेश बाला सकूजा द्वारा किया जाता रहा है. लेकिन हाल के दिनों में मंदिर में नए ट्रस्ट के निर्माण और कमेटी के गठन के बाद से ही मतभेद चरम पर पहुंच गए हैं. क्षेत्र का एक गुट इस व्यवस्था को मानने को कतई तैयार नहीं है, जिसके कारण धार्मिक आस्था का यह केंद्र फिलहाल राजनीतिक अखाड़े में तब्दील होता नजर आ रहा है. बैठक में अपनी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए लोगों ने स्पष्ट किया कि जनभावनाओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इस मौके पर दिनेश सिंह, महेश कुमार, राजेश दुबे, मनोज साव, मनोज पाठक, विजय नैयर, बिजय रावत, अनामिका रावत, राजकुमारी देवी, राजू पंडित सहित भारी संख्या में स्थानीय महिला-पुरुष और नागरिक उपस्थित थे.
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